पायल राजपूत साउथ की फिल्मों में काम कर रही हैं। वहां उनकी कुछ फिल्में बनी हैं और एक फिल्म ‘इरुवरुअलम’ रिलीज होने वाली है। वहां की फिल्मों में उनकी खूब मांग है, तो फिर वे हिंदी धारावाहिक में क्यों दिखने लगीं? पायल राजपूत कहती हैं, ‘धारावाहिक ‘बहू भी तो बेटी ही है’ में मेन लीड रोल इसलिए किया है, क्योंकि मैं हिंदी फिल्मों में आना चाहती हूं। इन दिनों ऐसा देखने को खूब मिल रहा है कि हिंदी धारावाहिकों की हीरोइनें फिल्मों में अच्छा नाम कमा रही हैं। मैं इसी सोच के तहत धारावाहिक की दुनिया में आई हूं। यह मेरा पहला धारावाहिक है।’
पायल राजपूत मूल रूप से दिल्ली के पश्चिम विहार की हैं। उनकी पढ़ाई भी यहीं हुई है। फिर उन्होंने मास कॉम की पढ़ाई की, लेकिन होता वही है जो किस्मत में लिखा होता है। वे आ गई मॉडलिंग की दुनिया में और फिर उन्हें साउथ की फिल्मों में अवसर मिल गया। वे वहां की फिल्मों में बिजी हो गई। अब वे सहारा वन के धारावाहिक ‘बहू भी तो बेटी ही है’ में सिया की भूमिका निभा रही हैं। इस रोल में ऐसा क्या खास था जिसने पायल को स्वीकारने के लिए मजबूर किया? वे बताती हैं, ‘मैं पहले भी बता चुकी हूं कि मेरी इच्छा है हिंदी फिल्मों में काम करने की और इससे अच्छा रास्ता और कोई मुझे समझ में नहीं आ रहा था। इसलिए मैंने ऐसा किया। फिर मैंने देखा कि सिया की भूमिका में वे सारी चीजें हैं जो एक अभिनेत्री को अपनी क्षमता दिखाने के लिए चाहिए होती हैं। मैं सिया का रोल पाकर खुश हूं। मुझे उम्मीद है कि मेरे काम को लोग पसंद करेंगे।’
पायल राजपूत अपनी सिया की भूमिका के बारे में और इस धारावाहिक के बारे में बताती हैं, ‘दरअसल यह कहानी एक ऐसे सास-बहू की है, जो समय के हिसाब से अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन जेनरेशन गैप को समझना और मानना हर कोई नहीं चाहता। ऐसी ही कुछ बातें हैं इस धारावाहिक की कहानी में। सिया की सोच आज की है और उसकी सास की सोच अपने जमाने की है। हालांकि परिवार में नए और पुराने सोच के मायने होते हैं, लेकिन आज के लोग उन बातों को ज्यादा तरजीह नहीं देते। सिया आज की जरूर है लेकिन वह उस जमाने की बातों की भी कद्र करती है। यह बात जब उसकी सास को मालूम होती है, फिर कहीं कोई दिक्कत नहीं आती। कहानी का आधार है गोरखपुर का एक परिवार। वहां की संस्कृति और संस्कार।’
सिया की भूमिका में अलग क्या है? पायल से इस बारे में बात होती है तो वे कहती हैं, ‘मैं अभिनेत्री हूं और एक अभिनेत्री को हर रंग वाली भूमिकाएं चाहिए होती हैं। यह मेरा पहला सीरियल है और सिया यानी रामायण की सीता की भूमिका में कितने रंग हैं, यह सभी जानते हैं। मेरी भूमिका में तमाम रंग हैं और उनको जीने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी होगी। मैं वह सब कर रही हूं और यूनिट के लोग मेरे काम से खुश भी हैं, लेकिन सारी बात आती है दर्शकों की पसंद पर। अगर उन्होंने मुझे पसंद किया, तो समझिए कि नैया पार हो गया।’
आगे क्या करने का इरादा रखती हैं पायल राजपूत? वे बताती हैं, ‘अभी मैंने ऐसा कुछ नहीं सोचा है, लेकिन कुछ काम मेरे पास आ रहे हैं। मैं उन्हें देख रही हूं। फिल्में भी हैं, लेकिन अभी इस बारे में बात फाइनल स्टेज पर जाने के बाद ही कुछ बता सकूंगी। फिलहाल ध्यान इसी धारावाहिक पर है।’


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