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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पिछले एक महीने से कई ताबड़तोड़ फैसले ले रही है. सूत्रों के मुताबिक अब बुधवार को योगी सरकार ने पूर्व की अखिलेश यादव सरकार की चर्चित स्मार्ट फोन योजना को रद्द कर दिया है. आपको बता दें कि इस योजना के तहत 5 करोड़ लोगों को काफी सस्ते दाम पर स्मार्टफोन मुहैया कराना था. अखिलेश यादव ने यह योजना अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में ही लॉन्च की थी.

अखिलेश यादव का इस योजना के जरिये सीधे जनता तक पहुंचने का लक्ष्य था. उनके अनुसार इसके कारण लोगों तक सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी आसानी से पहुंचाई जा सकती थी. आपको बता दें कि इस योजना के तहत लगभग 1 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके थे. अखिलेश यादव ने चुनाव प्रचार के दौरान जमकर इस योजना का प्रचार किया था.


योगी सरकार का एक महीना- जानें 5 बड़े चुनावी वादों का क्या हुआ?

समाजवादी मुक्त राज्य सरकार
योगी सरकार ने सत्ता में आते ही समाजवादी पार्टी का नाम सरकार से हटाने को लेकर ताबड़तोड़ फैसले लिये. सीएम योगी समाजवादी पेंशन योजना, समाजवादी एंबुलेंस सेवा व अन्य कई योजनाओं से समाजवादी नाम हटाया. तो वहीं अखिलेश यादव की तस्वीर वाले राशनकार्ड वापिस लेने का फैसला भी किया. योगी ने लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट को बनाने में आये खर्च को लेकर जांच के आदेश भी दिये हैं.

योगी सरकार के SUPER-30 फैसले जो उत्तर प्रदेश को बनाएंगे उत्तम प्रदेश

पुलिसवालों के ताबड़तोड़ तबादले
मंगलवार शाम को यूपी पुलिस के कुल 626 पुलिस कर्मियों का ट्रांसफर किया गया. प्रदेश में प्रशासन व्यवस्था को चुस्त- दुरुस्त बनाने के लिए योगी सरकार बड़े पैमाने पर तबादले कर रही है. यूपी पुलिस से हासिल जानकारी के मुताबिक कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक के 338 पुलिस वालों को ज़ोन और रेंज से हटाया गया है. इसी प्रकार 288 को मुख्यालय स्तर से हटाकर दूसरी जगहों पर भेज दिया गया है.

योगी सरकार का एक महीना पूरा, बूचड़खानों से लेकर एंटी रोमियो को लेकर रहा विवाद...

बदल दिये एयरपोर्ट के नाम
मंगलवार को कैबिनेट बैठक के दौरान योगी सरकार ने कई एयरपोर्ट के नाम बदले. इनमें गोरखपुर हवाई अड्डा के सिविल टर्मिनल का नाम महा योगी गोरखनाथ जी होगा. वहीं आगरा एयरपोर्ट का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी दिल्‍ली नगर निगम के चुनावों के लिए रविवार को घोषणापत्र जारी कर दिया है। दिल्‍ली बीजेपी अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर घोषणापत्र जारी कर 10 रुपये में खाने की थाली उपलब्ध कराने का ऐलान किया। इसके साथ ही पार्टी ने समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्ड जारी करने की भी घोषणा की।

बीजेपी ने रविवार को संकल्प पत्र जारी किया। इस अवसर पर मनोज तिवारी के साथ दिल्ली भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय, हर्षवर्द्धन, विजय गोयल जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। घोषणापत्र में बीजेपी ने वादा किया है कि पार्षद एवं निगम के पदाधिकारी हर महीने RWA के साथ मीटिंग कर उनकी समस्याएं समझेंगे और सुलझाएंगे। पार्टी का संकल्प पत्र जारी करते हुए तिवारी ने बताया कि 'दिल्ली को ढलाव मुक्त बनाएंगे और घर घर जाकर कचरा इकठ्ठा करेंगे। ड्रेनेज सिस्टम का नवीनीकरण करके जल भराव की समस्या को सुलझाया जाएगा। सभी बाजारों की नाईट क्लीनिंग करेंगे एवं शौचालय बनाएंगे।' बीजेपी ने एमसीडी चुनाव जीतने के बाद 500 वर्ग मीटर तक के प्लाट के लिए नक्शा पास करने की अनिवार्यता को समाप्त करने का भी वादा किया है। पार्टी ने अपने संकल्‍प पत्र में कहा है कि 'दिल्‍ली नगर निगम सभी रिक्‍शा चालकों, ऑटो रिक्‍शा एवं टैक्‍सी ड्राइवरों, फेरीवालों, घरेलू नौकरों, दिहाड़ी मजदूरों, औद्योगिक कामगारों एवं समाज के कमजोर वर्ग के लोगों ने लिए सामाजिक सुरक्षा कार्ड जारी करेगा। जिसके तहत असंगठित क्षेत्र के ये लोग बीमा, स्‍वास्‍थ्‍य, सुरक्षा एवं शिक्षा जैसी सुविधाएं प्राप्‍त कर सकेंगे। इन लोगों को उगाही और उत्‍पीड़न से बचाने के लिए ठोस और पुख्‍ता प्रबंध किए जाएंगे।'
बीजेपी ने अपने संकल्‍प-पत्र में वादा किया है कि वह नगर निगम के सभी अस्थाई सफाई कर्मचारियों को नियमित करेगी।' इसके अलावा 'प्रत्येक स्कूल में वाटर प्यूरिफायर एवं सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।’ पार्टी का कहना है कि 'महिलाओं के आर्थ‍िक स्‍वावलम्‍बन एवं स्‍वरोजगार को प्रोत्‍साहित करने के लिए उनका प्रशिक्षण तथा वित्‍तीय सहायता सुनिश्चित की जाएगी।'

बीजेपी ने दिल्‍ली में रहने वाले बिहारी वोटरों को लुभाने के लिए नए छठ घाटों के निर्माण एवं उनकी साफ़ सफाई की विशेष व्यवस्था कराने का भी वादा किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, मैं ये साफ-साफ कह रहा हूं कि ईमानदारों को परेशान करने की कोई हिम्मत नहीं करेगा, देश में अब ईमानदारों का सम्मान होगा, उनकी जय-जयकार होगी. लोगों ने मुझे इस देश को ठीक करने के लिए चुना है. उन्होंने कहा, गया वो जमाना जब सिर्फ जाता ही जाता था, अब ऐसी सरकार आई है, जहां सिर्फ आ रहा है. हमारे आने के बाद घोटाले बंद हुए, पैसा आना शुरू हुआ. हर बनारसवासी को यह गर्व होगा कि आपके सांसद पर कोई दाग नहीं लगा है.

पीएम मोदी ने अखिलेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी में विकास में भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष का नारा है 'कुछ का साथ, कुछ का विकास'. प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वांचल को विकास की ऊंचाई पर ले जाना मेरा सपना और इस इलाके के विकास से यूपी नंबर-1 बनेगा.

पीएम मोदी ने कहा, बनारस कोई शहर नहीं है, बल्कि एक जीती जागती विरासत है. भारत के हर नागरिक को बनारस अपना शहर लगता है. पिछली सरकारें बनारस के विकास को लेकर सिर्फ तिकड़म करती रही हैं और उनका उद्देश्य सिर्फ चुनाव जीतना रहा है, लेकिन इन तिकड़मों से बनारस का कुछ नहीं हो सका. बनारस का आधुनिकीकरण, इसके कायाकल्प की जरूरत है और मेरा सपना है कि बनारस को एक विश्वस्तरीय आधुनिक शहर में तब्दील करूं.

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जारी है और सातवें चरण की वोटिंग से पहले हर चुनावी दल पूरा जोर लगा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रोड शो किया. ऐसा सभी को दिखा और सभी ने यही समझा. सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस पहुंच गए थे और फिर बीएचयू से उनका काफिला निकला और आहिस्ता आहिस्ता काफिला बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचा था. सड़क पर उनके काफिला के जोरदार स्वागत हुआ. खुली जीप में सवार प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए भारी संख्‍या में लोग इकट्ठा हुए थे.
वाराणसी में प्रधानमंत्री का रोडशो उस दिन हुआ जिस दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में छठे चरण के लिए 49 सीटों पर मतदान हुआ है जिसमें गोरखपुर और आजमगढ़ भी शामिल है. वाराणसी क्षेत्र में 80 प्रतिशत हिन्दू आबादी है और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए एक बार फिर भाजपा मोदी पर काफी हद तक निर्भर दिख रही है. उत्तर प्रदेश में भाजपा 15 वर्षों से सत्ता से बाहर है.अब पीएम मोदी की कैबिनेट में मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कल रोड शो था ही नहीं, पीएम काशी कल भैरव मंदिर के दर्शन के लिए आए थे, रास्ते में जनसैलाब उनक साथ जुड़ गया. गोयल ने कहा कि अनुमति कल भी थी, दर्शन के लिए पूरे रोड की अनुमति थी, कल के उत्साह को देखके आज का रोड शो निर्धारित कर दिया है.अब पीएम मोदी की कैबिनेट में मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कल रोड शो था ही नहीं, पीएम काशी कल भैरव मंदिर के दर्शन के लिए आए थे, रास्ते में जनसैलाब उनक साथ जुड़ गया. गोयल ने कहा कि अनुमति कल भी थी, दर्शन के लिए पूरे रोड की अनुमति थी, कल के उत्साह को देखके आज का रोड शो निर्धारित कर दिया है.बीजेपी की ओर से कहा जा रहा है कि शनिवार को एक घंटे तक चले इस कथित रोडशो से उसे 8 मार्च को होने वाले अंतिम चरण के चुनाव में 40 सीटों पर काफी फायदा होगा जिसका अधिकांश क्षेत्रीय चैनलों ने सीधा प्रसारण किया. रोडशो के दौरान प्रधानमंत्री की झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम बनारस की सड़कों पर उमड़ पड़ा. लोग कई तरह के नारे लगा रहे थे जिसमें ‘सुबह बनारस, शाम बनारस : मोदी तेरे नाम बनारस’, मोदी, मोदी, जैसे नारे शामिल हैं. प्रधानमंत्री हाथ उठाकर और हाथ जोड़कर लोगों को अभिवादन कर रहे थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की जिसे इस प्राचीन शहर में हिन्दुओं का दो प्रमुख स्थान माना जाता है. पीएम मोदी ने बाद में ट्वीट किया, ‘बाबा विश्वनाथ मंदिर जाकर सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं. हर हर महादेव. काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना करके भाग्यशाली महसूस कर रहा हूं.’ उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा का सपा-कांग्रेस गठबंधन और मायावती नीत बसपा से कड़ा मुकाबला है और पार्टी को उम्मीद है कि राज्य के पूर्वी हिस्से अच्छा प्रदर्शन करके वह 403 सीटों वाले विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा हासिल कर सकती है.

उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर विधानसभा चुनाव में पहले चरण में आज 38 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. वोट डालने के लिए लोग पोलिंग बूथ पर पहुंच चुके हैं. बाकी 22 सीटों पर मतदान 8 मार्च को होगा
.-वोट डालने के बाद इरोम शर्मिला ने कहा कि वो राजनीति की दिशा बदल देगीं. चुनाव में धन बल का उपयोग करने के लिए उन्होंने बीजेपी पर हमला किया. उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के खिलाफ जीतेंगी.


-11 बजे तक 43 फीसदी वोटिंग


-इरोम शर्मिला ने डाला वोट


-पहले घंटे में 10 फीसदी वोटिंग


मणिपुर में कुल 1,643 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं. इस चरण में कुल 168 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 19,02,562 मतदाता करेंगे. इस मतदाताओं में 9,28,562 पुरुष और 9,73,989 महिलाएं हैं, जबकि नए मतदाताओं की संख्या 45,642 है.

कुल 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव की दौड़ में शामिल सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना चुनाव प्रचार मुख्यत: यूनाइटेड नगा काउंसिल द्वारा लागू आर्थिक नाकेबंदी और इसे तोड़ने में राज्य सरकार की नाकामी पर फोकस किया है. कथित विकास की कमी, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, कोषों का दुरुपयोग और राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को भी राजनीतिक पार्टियों ने उठाया है.

इस बार मैदान में इरोम शर्मिला
बहरहाल, पिछले साल अपना अनशन तोड़ पीपल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस नामक पार्टी का गठन करने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू पर सभी की निगाहें हैं. अफ्सपा हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला 16 साल से अनशन पर थीं और अब वह चुनाव लड़ रही हैं.

लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लोकसभा क्षेत्र आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के सात जिलों की 49 सीटों के लिये प्रचार का शोर आज शाम पांच बजे थम गया.
इस चरण में भाजपा के हिन्दुत्ववादी नेता सांसद महन्त आदित्यनाथ के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर, माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के क्षेत्र मउ तथा केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के संसदीय क्षेत्र देवरिया में चुनाव पर खास नजर रहेगी.
छठे चरण में नेपाल से सटे महराजगंज और कुशीनगर के साथ-साथ गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, मउ तथा बलिया जिलों की 49 सीटों पर आगामी चार मार्च को मतदान होगा. इस चरण के चुनाव प्रचार में भी भाजपा, सपा, कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत लगायी. इस दौरान विभिन्न नेताओं के बीच जबानी कडवाहट भी जाहिर की गयी. भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य ने सपा, कांग्रेस और बसपा को ‘सांप' और ‘समाज के कैंसर' की संज्ञा दी.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कारनामे बोलते हैं' के जुमले से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा. साथ ही सकल घरेलू उत्पाद को लेकर केंद्र के सकारात्मक आंकड़ों की आड़ में नोटबंदी का विरोध करने वालों को खरीखोटी सुनायी.
मोदी ने अखिलेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर लिखी उत्तर प्रदेश की बदहाली बयान करती इबारत का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा ‘नारियल का जूस' निकलवाकर बेचने की टिप्पणी को लेकर उनका मजाक भी उड़ाया.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आज चुनाव प्रचार के आखिरी दिन गोरखपुर में रोडशो निकाला. अपनी जनसभाओं में उन्होंने राज्य की अखिलेश यादव सरकार पर जमकर प्रहार किये. बसपा मुखिया मायावती ने अपनी जनसभाओं में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिम्पल यादव पर भी तंज कसा.
छठे चरण में 77 लाख 84 हजार महिलाओं समेत करीब एक करोड़ 72 लाख मतदाता कुल 635 प्रत्याशियों के राजनीतिक भाग्य का फैसला कर सकेंगे. इसके लिये 17 हजार 926 मतदान केंद्र बनाये गये हैं. वर्ष 2012 में इन सीटों में से सपा ने 27, बसपा ने नौ, भाजपा ने सात तथा कांग्रेस ने चार सीटें जीती थी, जबकि दो सीटें अन्य के खाते में गयी थीं.
इस चरण में सबसे ज्यादा 23 उम्मीदवार गोरखपुर सीट पर मैदान में हैं, जबकि सबसे कम सात उम्मीदवार मउ जिले की मोहम्मदाबाद गोहना सीट से किस्मत आजमा रहे हैं. सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र आजमगढ़ में विधानसभा की 10 सीटें हैं. वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने इनमें से नौ सीटें जीती थीं. हालांकि मुलायम ने इस बार आजमगढ़ में एक भी चुनावी रैली नहीं की है.
छठे चरण में सांसद आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी. छठे चरण में होने वाले चुनाव में प्रमुख उम्मीदवारों में बसपा छोडकर भाजपा में आये स्वामी प्रसाद मौर्य (पडरौना), भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही (देवरिया), पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव के बेटे श्याम बहादुर यादव (फूलपुर पवई), सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री अम्बिका चौधरी (फेफना) और नारद राय (बलिया सदर) शामिल हैं.
इसके अलावा मउ से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, उनके बेटे अब्बास अंसारी (घोसी) की परीक्षा भी इसी चरण में होगी. प्रदेश का विधानसभा चुनाव सात चरणों में होगा. आखिरी चरण का चुनाव आठ मार्च को होगा. नतीजे 11 मार्च को आएंगे.

फरवरी 2016 में जेएनयू में कथित देश विरोधी नारे लगाए जाने के बाद देश भर में राष्ट्रवाद पर चर्चा छिड़ गई. घटना के बाद उस समय जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार को राष्ट्रद्रोह की धारा में गिरफ्तार किया गया. घटनाक्रम चलता रहा और आज पूरा एक साल बीतने के बाद भी जेएनयू प्रकरण मे चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई.

आजतक द्वारा जेएनयू में लगाए गए नारों की वॉयस सैंपल की फॉरेंसिक पड़ताल में पता चला है कि कन्हैया की आवाज उन नारों में मौजूद नहीं है, लेकिन उमर खालिद और अनिर्बान की आवाज मौजूद है. हालांकि जेएनयू कैंपस के चप्पे-चप्पे की आजतक की पड़ताल से यह भी पता चला है कि वहां अब भी कई जगह ऐसे विवादास्पद पोस्टर लगे हैं, जिन्हें देश विरोधी माना जा सकता है.
इस साल मामला उठा है दिल्ली विश्वविद्यालय में जहां करीब 20 साल की गुरमेहर कौर के एक सवाल ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है. लेकिन एबीवीपी का आरोप है कि डीयू में भी देश विरोधी नारे लगाए गए. इन्हीं आरोपों के बीच डीयू के तार जेएनयू से जोड़े जाने लगे क्योंकि डीयू का विवाद उठा ही था जेएनयू के छात्र और जेएनयू में देश विरोधी नारों के आरोपी उमर खालिद को बुलाए जाने को लेकर.
तो आखिर ऐसा क्या है जेएनयू में जिसकी वजह से देश का एक सबसे बेहतरीन और उच्च शिक्षा संस्थान विवादों का केंद्र बन गया है? आजतक ने पूरा दिन जेएनयू कैंपस में बताया और चप्पे-चप्पे को छानकर पता लगाया उस एक्स फैक्टर का, जिसकी वजह से जेएनयू पर उंगलियां उठती हैं. जेएनयू कैंपस में घूमने पर जहां कई पोस्टर छात्रों के वाजिब अधिकारों के लिए मिलते हैं तो कई पोस्टर ऐसे हैं जो विवाद की जड़ हैं.
फ्रीडम स्क्वायर पर पोस्टर वार 
जेएनयू एडमिन ब्लॉक जिसे फ्रीडम स्क्वाॉयर के नाम से जाना जाता हैं, वहां रोहित वेमुला की तस्वीर है, तो साथ में वह पोस्टर भी हैं जो कहते हैं कि "फरवरी 2016 में हम लड़े ओर आगे भी लड़ेंगे.'
कैंपस यात्रा में आगे हमारा पड़ाव था- स्कूल ऑफ सोशल साइंस और वहां पर कुछ पोस्टर ऐसे भी मिले जो विवादास्पद थे. जहां एक पोस्टर में फांसी की सजा रोकने की मांग थी, तो एक दूसरे पोस्टर में गुजरात और मुजफ्फरनगर दंगों के लिए आरएसएस और बीजेपी को जिम्मेदार बताते हुए हमला बोला गया है. अभ‍िव्यक्ति की आजादी की मांग के बीच छात्र राजनीति का ये चेहरा और वो भी विश्वविद्यालय के भीतर, एक सवाल जरूर खड़ा करता है.
इसी ब्लॉक में आगे हमें एबीवीपी के वो पोस्टर दिखे, जो तमाम आतंकी संगठनों को एक बताते हैं, तो दूसरे गुट BASO के पोस्टर में 50 साल के नक्सलबाड़ी आंदोलन की बात कहते हुए लिखा गया है कि नक्सलबाड़ी आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा. इस पोस्टर को नक्सलबाड़ी आंदोलन के समर्थन में लगाया गया है. BASO वही संगठन है जिससे उमर खालिद जुडे़ हैं.
कश्मीर के लिए आजादी वाले पोस्टर 
स्कूल ऑफ सोशल साइंस में ही हमें वो तस्वीर दिखी जो जेएनयू को विवादों के घेरे में खड़ा करती है. इस पोस्टर पर लिखा है- 'कश्मीर के लिए आजादी.' यह वही विवादास्पद नारा है जो फरवरी 2016 में जेएनयू में गूंजा था और हाल ही में रामजस कॉलेज में. पोस्टर पर साफ-साफ लिखा है, कश्मीर के लिए आजादी और फिलिस्तीन की आजादी, जिसे लगाया है डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन (डीएसयू) ने.

वामपंथी छात्र गुट एसएफआई की नेता दीप्शिता कहती हैं कि ये उन छात्रों की अभिव्यक्ति की आजादी है जो कश्मीर की आजादी की वकालत करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं की पूरा जेएनयू इसकी हिमायत करे. दीप्शिता का कहना है कि एक बड़ा गुट है जो यह मानता है कि कश्मीर से सेना हटे, लेकिन भारत से कश्मीर की आजादी कोई नहीं मांगता. हालांकि, जेएनयू में लगा ये पोस्टर एसएफआई के इस दावे को नकारता है.

इस विवादास्पद पोस्टर से पता चलता है कि आखिर क्यों जेएनयू में कथित देश विरोधी नारे लगते हैं और क्यों जेएनयू पर सवाल उठते हैं. डीएसयू वहीं संगठन है जिससे उमर खालिद और अनिर्बान जुड़े थे, जो जेएनयू नारेबाजी मामले में आरोपी भी हैं. हालांकि दोनों साल 2015 के अंत में ही डीएसयू से इस्तीफा दे दिया था.

अधिकारों और देश के खिलाफ पोस्टर और नारों के विवाद पर बोलते हुए जेएनयू के छात्र संदीप और महेश कहते हैं कि हर वह चीज विवादास्पद लगती है जो किसी के खिलाफ हो. दोनों का मानना है कि जेएनयू में हर बात पर चर्चा होती है. कश्मीर पर भी चर्चा होती है, लेकिन कश्मीर की भारत से आजादी पर उनकी राय पोस्टर की तरफ साफ नहीं है. संदीप का कहना है कश्मीर में लोगों के अधिकारों पर बात होनी चाहिए.

वहीं दूसरे छात्र गुट एबीवीपी का दावा है कि जेएनयू में कई बार ऐसी गतिविधियां हुई हैं जो आपत्तिजनक हैं और देश के खिलाफ हैं. तमाम आरोपों और दावों के बीच जेएनयू के से विवादास्पद पोस्टर ही वे बड़ी वजह हैं, जो हर बार विवादों को जन्म देते हैं.

पूर्वांचल के मऊ जिले में सियासी लड़ाई डॉन बनाम है. यानी हर कोई डॉन से लड़ रहा है. ये डॉन स्वतंत्रता सेनानी का खून है. इसके दादा आजादी से पहले 1927 में कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. इस चुनाव में हर कोई उस शख्स से लड़ रहा है, जो 12 सालों से सलाखों के पीछे है. वो 20 सालों से लगातार 4 बार मऊ सदर सीट से चुनाव जीतता आ रहा है. पार्टी उसके लिए ज्यादा मायने नहीं रखती. एक बार फिर वो बसपा के हाथी पर सवार होकर 5वीं बार विधानसभा पहुंचने का सपना सलाखों के भीतर से देख रहा है. जी हां, हम बात कर रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी मुख़्तार अहमद अंसारी के पोते और पूर्वांचल के डॉन मोख्तार अंसारी की.

मोख्तार खुद जेल में हैं, लेकिन वो खुद तो चुनाव लड़ ही रहे हैं, साथ ही उनके बड़े बेटे अब्बास बगल की सीट घोसी से बसपा के टिकट पर मैदान में हैं. इतना ही नहीं मोख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्ला भी बगल के जिले गाजीपुर की युसुफपुर मोहम्मदाबाद से बतौर बसपा उम्मीदवार लड़ रहे हैं. मोख्तार के बड़े बेटे अपने चुनाव में व्यस्त हैं, तो बड़े भाई अपने चुनाव में. लेकिन मोख्तार के कार्यालय पर रौनक पहले जैसी ही है. कोई तो है जिसमें मोख्तार समर्थक अपने मोख्तार की छवि देख रहे हैं.


अचानक कार्यालय में 18-20 साल का लड़का दाखिल होता है. दाढ़ी-मूंछ भी ठीक से नहीं जमी है, लेकिन लंबा कद,आंख में चश्मा, गले में लंबा साफा और बात करने का अंदाज काफी हद तक मोख्तार जैसा. ये हैं मोख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अंसारी. जो दिल्ली में बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन पिता के चुनाव को संभालने के लिए आए हैं.

वैसे मोख्तार अंसारी 2005 के मऊ दंगों के बाद से ही जेल में हैं. यानि तब 12 साल पहले उनके छोटे बेटे उमर महज 7-8 साल के थे. अब बालिग होकर पिता मोख्तार के लिए कमान संभाले हैं. इनका अंदाज भी मोख्तार जैसा है, किसी को ये महसूस ना हो कि, मोख्तार जेल में है इसका वो खास ख्याल रखते हैं, हर किसी को कहते हैं कि, चिंता की कोई बात नहीं है.

आजतक से बातचीत में पिता को बाहुबली, डॉन या अपराधी कहे जाने पर कहते हैं कि, ये मीडिया के एक तबके और विरोधियों का दिया नाम है, जिसमें सच्चाई कतई नहीं हैं. वो कहते हैं कि, क्षेत्र की जनता उनके पिता को गरीबों का मसीहा मानती है. हां आप उनको रॉबिन हुड कह सकते हैं. वो कहते हैं 2007 में भी पिता जेल में थे, तब भी निर्दलीय जीते थे, इस बार तो बसपा जैसी पार्टी भी साथ है.

कौमी एकता दल का विलय सपा में रोकने वाले अखिलेश यादव को उमर भैय्या कहते हैं. लेकिन लगे हाथ अपनी नाराजगी भी जाहिर करते हैं. उमर के मुताबिक, राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव के वक्त सपा की तरफ से कौमी एकता दल से हाथ मिलाने की पेशकश हुई, खुद अखिलेश ने इस पर सहमति दी, फिर बाद में वो ना जाने किस बहकावे में आ गए. पर मैं अखिलेश भैया से वही कहूंगा जो मुलायम सिंह ने कहा कि, जो अपने बाप का ना हुआ वो आपका क्या होगा. एक बेटा होने के नाते मैं तो ऐसा सोच भी नहीं सकता कि, पिता के रहते जबर्दस्ती उनकी पावर छीन लूं.

इस इलाके में मोख्तार 20 सालों से विधायक हैं, लेकिन रोजगार, बुनकरों की बड़ी आबादी की समस्याएं, मिल, फैक्ट्री नहीं होना लोगों की आम समस्याएं हैं. यहां दो बड़ी मिल थीं, जो बंद होकर खंडहर हो रही हैं, तो वहीं झील के बीच टूरिज्म विभाग का बना जल महल है, जो बंद पड़ा है, धूल खा रहा है और झाड़ियों से घिर चुका है. विकास की आस में ही लोग हैं. विरोधी इसी को मुद्दा बना रहे हैं. वो कहते हैं कि, 2000 और 2005 में जब दंगे हुए तब मोख्तार अंसारी विधायक भी थे और जेल से बाहर भी. फिर 2005 के बाद वो कृष्णानन्द राय हत्याकांड में आरोपी के तौर पर जेल चले गए. उसके बाद से दंगे नहीं हुए. लेकिन कैमरे पर खुलकर विरोधी भी ये बात बोलने को तैयार नहीं.

हां, नारा जरूर विरोधी लगाते हैं कि, तख्त बदल दो, ताज बदल दो, 20 साल का राज बदल दो. मोख्तार अंसारी के सामने सपा के अल्ताफ अंसारी हैं, जो यहां के मुसलमानों की बड़ी आबादी वाली बुनकर बिरादरी से हैं. वो बताना नहीं भूलते कि, मोख्तार अंसारी मुस्लिमों की अगड़ी जाति से हैं, सिर्फ नाम के अंसारी हैं. लेकिन मोख्तार को डॉन, बाहुबली या अपराधी बोलने के सवाल पर अल्ताफ कहते हैं कि, मैं कुछ नहीं कह सकता, वो डॉन, बाहुबली या अपराधी हैं या नहीं , जनता से पूछिए.

वैसे इस इलाके में चुनाव का मुद्दा घूम फिरकर मोख्तार अंसारी के इर्द-गिर्द दिखता है. लोगों से बात करने पर मोख्तार समर्थक मोख्तार को गरीबों का मसीहा बताते हैं, बताते हैं कि, हर मौके पर सालों से उनके कार्यालय से हर तरह मदद हो जाती है. तो वहीं, विरोधी कहते हैं कि, मोख्तार के वक्त में विकास नहीं हुआ, वो चुनाव के वक्त सिर्फ हिन्दू और मुसलमान करके साम्प्रदायिकता फैलाते रहे हैं.

वैसे इस दिलचस्प लड़ाई में बीजेपी के साथ गठबंधन के चलते भारतीय समाज पार्टी के चुनाव निशान छड़ी से उम्मीदवार महेंद्र राजभर भी हैं, जो उम्मीद लगाए हैं कि, दो मुस्लिमों के बीच वोट बंटने का फायदा उनको हो जाएगा. लेकिन यहां सब बाहुबली मोख्तार के इर्द-गिर्द है, इसलिए हाल ही में यहां रैली में पीएम मोदी ने अपना चुनाव निशान छड़ी हाथ में पकड़े महेंद्र राजभर को कटप्पा करार दिया और कहा कि, बाहुबली को कटप्पा ही हराएगा.

कुल मिलाकर डॉन जेल में है, पर चुनाव मैदान में है. इसलिए यहां मुद्दा भी डॉन ही लगता है. अब देखना होगा कि डॉन की हाथी की सवारी उनको विधानसभा ले जा पाती है या नहीं.

उत्तर प्रदेश में पांच चरणों का मतदान हो चुका है. पहले और दूसरे चरण में राज्य की जनता ने खुलकर मतदान किया और मतदान प्रतिशत 65 फीसदी के करीब पहुंचा लेकिन इसके बाद हुए मतदान प्रतिशत लगातार कम होता जा रहा है.
तीसरे चरण में 62 फीसदी मतदातों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. चौथे चरण में मतदान का प्रतिशत 61 फीसदी रहा और पांचवे चरण में मतदान का प्रतिशत लगभग 58 फीसदी रहा.

क्यों हो रहा है उत्साह कम? 
जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ रहा है मतदातों में उत्साह कम हो रहा है. कुछेक मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसके पीछे खेत में फसल की निराई, बुआई का होना. मतदान प्रतिशतों के कम होने के पीछे एक और वजह यह बताई जा रही है कि इलाके के बहुत से लोग राज्य से बाहर रहते हैं उनके लिए केवल मतदान के लिए आना मुश्किल है.

यूपी विधानसभा चुनाव के पांचवे चरण का मतदान प्रदेश के 11 जिलों की 51 सीटों पर सुबह सात बजे से जारी है। दोपहर एक बजे तक पांचवे चरण की 51 सीटों पर 38.72 फीसद वोटिंग हुई है। फैजाबाद में 41.18 फीसद, गोंडा में 36.7 फीसद वोटिंग हुई । इससे पहले सुबह 11 बजे तक 27 फीसद मतदान हुआ। वहीं, वोटिंग के शुरूआत में अमेठी के राजघराने के राजा संजय सिंह समेत दोनों रानियों अमिता और गरिमा सिंह ने भी मतदान किया। यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति भी सुबह-सुबह पोलिंग बूथ पर वोटिंग करने के लिए पहुंचे।
 बीजेपी के स्टार प्रचारक और सांसद विनय कटियार ने कटरा के पोलिंग बूथ पर वोट डाला। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ राम मंदिर भी जरूरी है। पीएम मोदी सभी मुद्दों की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पचास हजार के अंतर से जीत दर्ज कर रहे हैं। वहीं, वोटिंग शुरू होने के कुछ देर बाद बहराइच के जरवल में एक परिवार ने पहले मतदान किया फिर घर में रखी अर्थी को उठाया। बूथ संख्या 370 पर सुबह 7.40 बजे पहुंचकर पूरे परिवार ने मतदान किया। 
इस चरण में समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन का खासतौर पर लिटमस टेस्ट होगा क्योंकि इस चरण में जिन सीटों पर मतदान होना है उनमें करीब 80 प्रतिशत पर इन्ही दलों का कब्जा है। इसमें कांग्रेस के गढ अमेठी समेत सुलतानपुर, फैजाबाद, अंबेडकरनगर और बहराइच में भी मतदान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस चरण में बस्ती, बहराइच और गोंडा समेत तीन जनसभाओं को संबोधित किया। अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी प्रचार में कोई कसर नहीं छोडी। अंबेडकरनगर जिले के आलापुर (सु०) सीट से सपा प्रत्याशी की मृत्यु हो जाने से चुनाव निरस्त कर दिया गया है। अब वहां आगामी नौ मार्चगठबंधन प्रत्याशी आमने सामने

सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी अमेठी और गौरीगंज विधानसभा सीटों पर आमने-सामने होने से दोनो पार्टियां दुविधा में हैं। कांग्रेस ने 11 जिलों में से सात जिलों में कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा है जिसमें फैजाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती और बहराइच शामिल हैं।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, सपा अध्यक्ष एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा कई केन्द्रीय मंत्रियों ने अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के पक्ष में कई जनसभाओं को संबोधित किया।

अमेठी में रानियों के बीच मुकाबला 

इस चरण के चुनाव में सभी की निगाहें अमेठी विधानसभा सीट पर लगी हैं जहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। इस सीट से कांग्रेस नेता संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह बीजेपी से और दूसरी पत्नी अमिता सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं जबकि सपा सरकार के बहुचर्चित मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने इसे त्रिकोणीय बना दिया है को मतदान होगा।

आरक्षण व अन्य मांगें मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे जाट आज काला दिवस मना रहे हैं। इसके चलते इंटरनेट बैन कर दिया गया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। काला दिवसराज्य में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। रोहतक, पानीपत, सोनीपत, झज्जर, कैथल और करनाल में धारा 144 लगा दी गई और रविवार शाम तक 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी रोक दी हैं।
आईपीसी की धारा 1973 की धारा 144 आदेश जारी कर इन्टरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। यह आदेश आज शाम 5 बजे तक लागू रहेंगे। आदेशों में कहा गया है कि असमाजिक तत्व सोशल मीडिया का दुरूपयोग करके अफवाहें फैला सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला में कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। मनाने के आह्वान के मद्देनजर सरकार ने पूरे हरियाणा में मुस्तैदी बढ़ा दी है।

नई दिल्ली: चुनावी दौर में गधों पर मचे सियासी घमासान मे अब आम आदमी पार्टी के नेता और कवि कुमार विश्वास भी कूद पड़े हैं। विश्वास ने ‘गधे’ वाले विवाद पर एक वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में विश्वास हास्य कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य की एक कविता सुनाते हैं। कविता की
लाइन गाते हुए कुमार विश्वास बताते हैं कि ओमप्रकाश आदित्य ने उनको और बाकी कई लोगों को कई बार यह कविता सुनाई थी लेकिन विश्वास नहीं जानते थे कि आज के दौर में वह कविता इतनी प्रसांगिक होगी। कविता में विश्वास गाते हैं, ‘इधर भी गधे हैं, उधर भी गधे हैं, जिधर देखता हूं गधे ही गधे हैं, गधे हंस रहे हैं,विश्वास आगे गाते हैं, ‘जवानी का आलम गधों के लिए है, ये रसिया ये बालम गधों के लिए है, ये दिल्ली ये पालम गधों के लिए है, ये संसार सालम गधों के लिए है, पिलाए जा साकी, पिलाए जा डटके, तू विस्की के मटके के मटके के मटके, मैं दुनिया को भूलना चाहता हूं, गधों की तरह अब झूमना चाहता हूं और घोड़ों को नहीं मिलती घास देखो, गधे खा रहे चवन्प्राश देखो।’ कविता को इस अंदाज में पेश किया गया कि जैसे गधे, इंसानों से भी श्रेष्ठ हों। आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने गधों पर इस तरह से कविता सुनाकर कहीं न कहीं इस मुद्दे पर गरमाई सियासत में अपनी भी एंट्री करा ली है।
बता दें कि यह विवाद अखिलेश यादव के बयान के बाद से शुरू हुआ। दरअसल अखिलेश ने रैली में कहा था कि सिने स्टार अमिताभ बच्चन को गुजरात के गधों का प्रचार नहीं करना चाहिए ये उनको शोभा नहीं देता। अखिलेश के इस बयान के बाद पीएम मोदी ने पलटवार करते हुए कहा था कि लोग चाहें तो गधे से भी सीख ले सकते हैं क्योंकि वह काफी मेहनती होता है। मैं खुद भी गधों की तरह ही काम करता हूं। पीएम ने कहा था क्या अकिलेश गधों से डर गए हैं। आदमी रो रहा है हिंदुस्तान में यह क्या हो रहा है?’

              

महाराष्ट्र और उड़ीसा निकाय चुनावों में जीत से उत्साहित दिल्ली बीजेपी ने दिल्ली के अलग अलग जगहों पर जीत का जश्न मनाया. सड़को से गलियों तक बीजेपी के कार्यकर्ता जीत के जश्न में ढोल नगाड़ों के साथ दिखे और लड्डू से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया. दिल्ली बीजेपी ने शनिवार को विजय दिवस के रूप में मनाया. इस दौरान बाजारों में निकाली गई पदयात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे भी लगाए गए.
नोटबंदी के बाद से थी असमंजस नोटबंदी से व्या प्रधानमंत्री मोदी को देते हुए दिल्ली जीतने की हुंकार भरी. उन्होंने महाराष्ट्र और उड़ीसा निकाय के तर्ज पर दिल्ली के भीतर भी ऐसी ही जीत की बात कही.पारियों की नाराजगी की आशंका से उदास कार्यकर्ताओं को मानो महाराष्ट्र और ओडिशा के निकाय चुनाव परिणाम ने जनता के समर्थन की मुहर लगा दी हो. मौके पर दिल्ली प्रभारी और केंद्रीय बीजेपी के उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने जीत का सेहरागौरतलब है कि दिल्ली में भी अप्रैल माह में स्थानीय निकाय यानि एमसीडी चुनाव होने वाले है. बीजेपी के दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद से यह चुनाव उनके लिए प्रतीष्ठा का सवाल बन गया है..


शुक्रवार को प्रधानमंत्री उप्र के गोंडा में चौपाल सागर के पास गोंडा और बलरामपुर जिले के उम्मीदवारों के 
पक्ष में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मोदी ने कहा कि तीन माह के अंदर जहां-जहां चुनाव हुए जनता ने तीसरे नेत्र की ताकत से भाजपा को भरपूर आशीर्वाद दिया। इसलिए, अब हमारी जिम्म
आनन्द राय, गोंडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गोंडा में अवध क्षेत्र की पांचवीं रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद की नई सीख दी। नेपाल सीमा पर होने वाले षड्यंत्र, गांव-गरीब, किसान, जवान और छात्रों के साथ ही स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय फलक से जोड़ते हुए उन्होंने आमजन से आशीर्वाद मांगा।
महाशिवरात्रि के दिन गरीबों के अंदर सच परखने की अद्भुत क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब भले स्कूल का दरवाजा न देखा हो, टीवी और अखबार से उसका जुड़ाव न हो लेकिन उसके पास भी भगवान शिव की तरह तीसरा नेत्र होता है। सच क्या है, गलत क्या है, वह अपने तीसरे नेत्र से बखूबी समझ लेता
इस अपार समर्थन से हमें दिन रात काम करने की प्रेरणा मिलती है। मैं देश को लूटने वालों को छोड़ने वाला नहीं हूं। 70 साल में जो लूटा गया उसे गरीबों को लौटाना चाहता हूं। अपने खिलाफ चलने वाले विपक्ष के बयानों पर आक्रामक मोदी ने कहा कि उन लोगों का झूठ फैलाने का भरपूर प्रयास होता है लेकिन हमारे देश का गरीब से गरीब इंसान सच पकड़ लेता है।
बहराइच की रैली में मायावती का तनिक भी जिक्र न करने वाले मोदी गोंडा में उन पर खूब हमलावर दिखे। कहा कि जबसे नोटबंदी हुई तबसे एक बड़ी ताकत झूठ फैलाने में जुटी है। परेशानी यह है कि बड़े-बड़े लोग भी बच नहीं पाए।
मायावती और मुलायम तो संसद में कहने लगे कि मोदीजी 500 और 1000 के नोट बंद करो लेकिन, समय तो दे दो। जिनका-जिनका जमा किया लुट गया अब सब गले लग रहे हैं। मोदी ने तंज किया कि 15 वर्षों से एक-दूसरे के उल्टा बोलने वाले सपा और बसपा की नोटबंदी के बाद भाषा, बोली एक हो गई।
सपा-बसपा का एक भी बंदा न जीते
मोदी ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ का नाम लिए बिना नेपाल में रची गई कानपुर ट्रेन दुर्घटना की साजिश का जिक्र किया। बोले कि पुलिस ने नेपाल में षड्यंत्र करने वालों का पता कर लिया। गोंडा और बलरामपुर नेपाल की सीमा पर हैं। साजिश रचने वालों से सर्वाधिक खतरा गोंडा को है। अगर गोंडा सुरक्षित रहेगा तो देश सुरक्षित रहेगा। इसीलिए उन्होंने आगाह किया।
अटल और शास्त्री की याद
मोदी ने लालबहादुर शास्त्री और अटल विहारी वाजपेयी को याद किया। कहा, अटलजी को इस क्षेत्र ने सबसे ज्यादा आशीर्वाद दिया है और उनके सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं। शास्त्रीजी ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया था और अटल जी ने जय जवान, जय किसान के साथ ही जय विज्ञान का नारा दिया। वैज्ञानिकों ने 104 सेटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ा तो दुनिया दंग रह गई
जवानों को पहले मौका मिलता तो कश्मीर कुछ और होता
मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक की याद दिलाई। बोले कि हमारे देश में जवानों का हौसला इतना बुलंद है कि कि वह कहते हैं कि ऐसा मौका पहले मिला होता तो शायद कश्मीर कुछ और होता। फौजियों ने सर्जिकल स्ट्राइक किया। सीमा पार दुश्मनों के घर जाकर उनको दिन में तारे दिखा आए।
सीएम के चेहरे पर फिर तंज
मोदी ने कहा कि अखिलेश का चेहरा देखकर पता चल जाता है कि चार चरण के मतदान में क्या हुआ। ओडिशा, महाराष्ट्र, चंड़ीगढ़ में हुए चुनाव के हवाले से उन्होंने कहा कि अखिलेश ने जिनको गले लगाया उनको देश की जनता ने विदाई दे दी
ताकि किसानों के साथ न हो धोखेबाजी
किसान बहुल इलाके में मोदी ने किसानों को खूब तरजीह दी। गन्ना किसानों का बकाया न मिलने के साथ घटतौली और देर से तौल को मुद्दा बनाते हुए मोदी ने कहा कि भाजपा की सरकार आने पर तकनीक जानने वालों का टास्क फोर्स बनाऊंगा ताकि किसानों के साथ धोखेबाजी न हो।
कहीं और लोग न सीख लें सपा का कारोबार
मोदी ने परीक्षा में होने वाली नकल का जिक्र किया और कहा कि गोंडा में तो इसका थोक कारोबार होने लगा है। कहा, गोंडा में जत्थाबंद चोरी का बिजनेस चलता है। जनता से पूछा कि क्या परीक्षा केन्द्रों की नीलामी बंद नहीं होनी चाहिए। फिर व्यंग्य किया।
कहने लगे कि टीवी पर बहुत से लोग मुझे सुनते हैं। डर लगता है कि सपा का यह कारोबार कहीं कुछ और लोग न सीख लें। मोदी ने कहा कि शिक्षा के साथ जुड़ने वाला यह अपराध आने वाली पीढ़ियों को तबाह करके रख दे।गा


सपा के फायरब्रांड नेता और अखिलेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां के हेलीकॉप्टर में अचानक खराबी आने की खबर से सनसनी मच गई है. कहा जा रहा है कि आजम अपने चुनावी दौरे से आपस आ रहे थे लेकिन उनका हेलीकॉप्टर रास्ते में ही खराब हो गया. जिसके कारण वो बाल बाल बच गए. क्योंकि तकनीकी खराबी की जानकारी मिलते ही पायलट हेलीकाप्टर को बाराबंकी के एक गांव के पास

आलू के खेत में उतार दिया.

सूत्रों की माने तो आजम शुक्रवार को बहराइच और अंबेडकरनगर में एक चुनावी सभा को संबोधित करने गये थे. वहीं से लौटने के दौरान उनके साथ यह समस्या उत्पन्न हो गई. पुलिस सूत्रों का कहना है कि आजम अपने लखनऊ स्थित आवास पर लौट रहे थे.

तभी बाराबंकी जिले के जहांगीराबाद क्षेत्र में उनका हेलीकाप्टर खराब हो गया.

हालांकि इसके हादसे में आजम सहीत हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग सुरक्षित बच गए. इसके बाद आजम को सड़क मार्ग से लखनऊ पहुंचाया गया. इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि आजम का हेलीकॉप्टर जैसे ही आलू के खेत में उतरा कि पास के गांव में हडकंप मच गई और लोगों की भीड़ वहां जम गई. जबकि मौके पर पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन के कई अधिकारियों को भी पहुंचना पड़ा.

क्या अब कांग्रेस और शिवसेना मिलकर देश की सबसे अमीर महानगरपालिका को चलाएंगे? खबर है कि दोनों पार्टियां बीएमसी में गठबंधन को लेकर अंदरखाते बातचीत कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को दूत भेजकर कांग्रेस से मेयर पद के लिए समर्थन मांगा है. बदले में कांग्रेस को डिप्टी-मेयर की पोस्ट देने का वायदा किया गया है. बीएमसी मेयर का चुनाव 9 मार्च को होना है.  अगर बीएमसी में कांग्रेस और शिवसेना साथ आते हैं तो ये फड़णवीस सरकार के लिए भी खतरे की घंटी होगी क्योंकि शिवसेना बीजेपी को कमजोर करने के लिए प्रदेश सरकार के समर्थन वापस ले सकती है. अगर ऐसा हुआ तो या तो मध्यावधि चुनाव होंगे या फिर बीजेपी को एनसीपी का साथ लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. एक रास्ता ये भी हो सकता है कि शिवसेना खुद बीएमसी की तरह राज्य में भी कांग्रेस और एनसीपी की मदद से सरकार बना ले.
बीजेपी के लिए बंद दरवाजे? 
हालांकि बीजेपी और शिवसेना के कुछ नेता अब भी बीएमसी में गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं. शुक्रवार को बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने शुक्रवार को कहा था कि हालात के मद्देनजर दोनों पार्टियों को साथ आना चाहिए. हालांकि उन्होंने साफ किया था कि इस बारे में आखिरी फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और उद्धव ठाकरे को लेना है. शिवसेना ने भी बीजेपी के साथ हाथ मिलाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है. हालांकि ठाकरे के हालिया तेवरों को देखते हुए ये आसान नहीं लगता. हालांकि ठाकरे ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं और हालात पर चर्चा के लिए आज पार्टी के सीनियर नेताओं और पार्षदों की बैठक बुलाई है.
शिवसेना के कुछ नेता मानते हैं कि राष्ट्रपति के लिए प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी के चुनाव के वक्त भी कांग्रेस और शिवसेना साथ आ चुके हैं. लिहाजा इस बार भी गठबंधन में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. 
अन्य पार्टियों पर डोरे 
बीएमसी में चुने गए 5 में से 3 आजाद पार्षदों ने शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है. ये सभी पार्टी के ही बागी उम्मीदवार थे. इसके अलावा डॉन अरुण गवली की पार्टी एबीएस का इकलौता पार्षद भी शिवसेना के हक में है. पार्टी की कोशिश जहां 7 सीटों वाली एमएनएस को रिझाने की है. वहीं, शिवसेना के कुछ नेता 9 सीटों वाली एनसीपी के भी संपर्क में हैं. पार्टी के रणनीतिकार इस कोशिश में हैं कि समाजवादी पार्टी और असुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को मेयर चुनाव के दौरान वोटिंग से दूर रहने के लिए राजी किया जाए.
कांग्रेस का रुख
वहीं, कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक पार्टी शिवसेना को बाहर से समर्थन देने का विकल्प तलाश रही है. पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच गठजोड़ पर आखिरी फैसला आने के बाद ही वो किसी नतीजे तक पहुंचेंगे. उनके करीबी विधायक अब्दुल सत्तार के मुताबिक पार्टी की राज्य इकाई शिवसेना को समर्थन पर हाईकमान को प्रस्ताव भेजेगी. प्रस्ताव में बीएमसी ही नहीं बल्कि राज्य भर के स्थानीय निकायों में शिवसेना से गठबंधन की इजाजत मांगी जाएगी. हालांकि कुछ कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि शिवसेना से हाथ मिलाना यूपी में मुस्लिम वोटरों को नागवार गुजर सकता है.
बरकरार रहेगी फडनवीस सरकार?
अगर शिवसेना स्थानीय निकायों में कांग्रेस और एनसीपी के करीब आती है तो उसके लिए राज्य और केंद्र में बीजेपी के साथ गठबंधन की सफाई जनता के सामने पेश करना मुश्किल होगा. ऐसे में सवाल बीजेपी पर उठेंगे. लिहाजा बीएमसी की सियासत से पैदा होने वाले समीकरण राज्य सरकार की सेहत पर भी असर डाल सकते हैं. मौजूदा विधानसभा में 122 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है जबकि शिवसेना के पास महज 63 सीटें हैं. लेकिन अगर इनमें कांग्रेस की 42 और एनसीपी की 41 सीटें जोड़ दी जाएं तो शिवसेना ना सिर्फ बहुमत का आंकड़ा पार करती है बल्कि राज्य में उसका मुख्यमंत्री भी हो सकता है. हालांकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन शिवसेना से हाथ मिलाएगा, इस पर गंभीर सवाल बरकरार हैं.


Russian President Vladimir Putin has quickly become one of the most powerful and feared politicians in the world.
But he's had a long climb to the top - he spent years working in Russian intelligence and local politics before becoming the leader of the country.
And Putin could become even more relevant to the US in the coming years. President Donald Trump has often been criticized for cozying up to the leader of a country that is thought to work to undermine Western democracies.
Here's a look at how Putin rose to power and why some Americans fear him.

DMK also termed Modi’s failure as “regrettable” saying, if Chief Minister O Panneeselvam had taken an all party delegation to meet him, the feelings of the people of the state could have been expressed better. But Modi also expressed his support to the state government’s decision, MK Stalin, DMK working president and opposition leader, said in a statement. Modi has appreciated the cultural significance of Jallikattu but has termed the matter as “subjudice”, he said.“AG said clearly that ordinance can be passed by the state Govt but till now TN CM is silent,” said MK Stalin. He added, “As the leader of opposition, I also asked for Assembly Session but no answer; so tomorrow we will be holding rail roko protest,” he added.After Prime Minister Narendra Modi’s failure to push for an ordinance to allow Jallikattu, the Dravida Munnetra Kazhagam were more agitated and announed a statewide “rail roko agitation” where they will create a massive blockade around the state’s railway stations during their protest.


जिले की 10 विधानसभा सीटों के लिए छठवें चरण में चार मार्च को मतदान होगा। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया के चौथे शुक्रवार को सपा के चार व बसपा के चार प्रत्याशियों सहित कुल 13 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किए। टिकट को लेकर चर्चा में रहे विधानसभा सीट सगड़ी से आखिरकार सेवानिवृत्त शिक्षक जयराम पटेल ने समाजवादी पार्टी से नामांकन किया। इसके अलावा समाजवादी पार्टी से निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक आलमबदी आजमी व दीदारगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक आदिल शेख ने पर्चा दाखिल किया। मेंहनगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक कल्पनाथ पासवान ने सपा से नामांकन किया।























UTTAR PRADESH:  Polling is being held in 73 assembly constituencies in Western Uttar Pradesh today in the first of seven phases of what is billed as a semi-final before the 2019 national election. A voter turnout of 39.34 per cent was recorded till 1 pm. The pressure today is on the BJP which swept the region in the 2014 national election, but now faces a test of Prime Minister Narendra Modi's notes ban, that resulted in a cash crunch seen to hit hardest the rural poor, who make up a big chunk of UP's voters. Opponents like Chief Minister Akhilesh Yadav's Samajwadi Party and partner Congress and Mayawati's BSP have spared no chance to attack the BJP on the impact of demonetisation. The BJP is also said to face some anger among the Jats of western UP who had voted en masse for it three years ago but now accuse the ruling party of not fulfilling promises it made then like reservation in government jobs for the community. UP has 403 seats and votes for all seven phases will be counted on March 11.








Hind Kesari

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