क्या अब मोदी समर्थक हिंदुओं को गोलबंद करने के बजाय मुस्लिमों में फूट डालने की आक्रामक रणनीति अख्तियार कर रहे हैं? ताजा संकेत यही बता रहे हैं।
गौरतलब है कि आरएसएस की अगुवाई में हिंदुत्ववादियों का समूह अब तक देश के हिंदुओं को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहा था। मुस्लिम समाज के अंदरुनी अंतर्विरोधों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा था। संघ से जुड़े विचारक देश की राजनीति को भी हिंदू समर्थक और मुस्लिमपरस्त (स्यूडो सेकुलर) इन दो श्रेणियों में बांट कर देखते रहे हैं। मगर, अब ताजा रुझान इस रणनीति में बदलाव का संकेत दे रहे हैं।
इसका सबसे तगड़ा संकेत सुब्रमण्यम स्वामी ने पिछले दिनों दिया। स्वामी न केवल संघ और बीजेपी से लंबे समय से जुड़े रहे हैं, दक्षिणपंथी विचारकों में भी उनकी गिनती होती रही है। मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने के लिए वह लगातार संघ और बीजेपी पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे प्रबल मोदी समर्थक स्वामी ने पिछले महीने की 21 तारीख को ट्विटर पर बाकायदा ऐलान किया कि हमें (यानी हिदुत्ववादियों को) हिंदुओं को एकजुट ही नहीं करना चाहिए बल्कि मुसलमानों में फूट डालने की भी कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने लिखा, ‘अगर टीडीके (यानी ताड़का, सोनिया गांधी के लिए उनके द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला विशेषण) हमारे खिलाफ मुस्लिम गोलबंदी का खेल खेलती हैं तो हमें निश्चित तौर पर हिंदुओं को एकजुट करने और मुस्लिमों को विभाजित करने की कोशिश करनी होगी।…’
स्वामी ने उसके बाद ‘आजतक’ चैनल पर सीधी बात कार्यक्रम में भी अपनी यह बात रखी कि हिंदुत्ववादियों को कोशिश करनी चाहिए कि मुस्लिमों में कैसे फूट पड़े। मोदी समर्थक खेमे में स्वामी के स्थान को देखते हुए यह मानना स्वाभाविक था कि स्वामी ने सार्वजनिक तौर पर इस रणनीति का खुलासा करने से पहले अपने करीबी लोगों से इस पर बातचीत की होगी। थोड़े ही समय बाद स्वामी के इस ट्वीट का असर दिखने लगा।
फेसबुक पर ‘इसे कहते हैं मोदी का जादू’ शीर्षक से एक ही तरह का टेक्स्ट अलग-अलग एफबी अकाउंट पर दिखने लगा। बड़ी संख्या में मोदी समर्थकों ने इसे शेयर किया। इसमें कहा गया था कि ‘हम कम जानकारी होने की वजह से भले मुसलमानों को एक मान लें, सच यह है कि उनमें काफी अंतर है और काफी विरोध भी है। दोनों समूहों के बीच दंगे और मारपीट भी होती रहती है।…’ इन बातों के बाद यह दावा गया था कि ‘सुन्नी भले बीजेपी और मोदी के खिलाफ हों, शिया लोग पूरी तरह मोदी जी के साथ हैं।’
इस रणनीति का असर मोदी समर्थकों के व्यवहार पर जल्द ही दिखने लगा। जब यूपी में आईएएस दुर्गा शक्ति को निलंबित करने का फैसला सरकार ने लिया तब भी इंटरनेट पर मोदी समर्थकों की प्रतिक्रिया कुछ अलग रूप में देखने को मिली। नवभारत टाइम्स साइट पर भी कई पाठकों ने कहा, वह मस्जिद सुन्नियों की थी, इसीलिए अखिलेश सरकार ने तत्काल फैसला करते हुए आईएएस दुर्गा को हटा दिया। अगर शियाओं की मस्जिद होती तो सरकार कोई कदम नहीं उठाती क्योंकि वह सुन्नियों की पक्षधर है।
यह एकदम नई प्रतिक्रिया थी। संघ, बीजेपी के तमाम समर्थक मुलायम सिंह को ‘मौलाना मुलायम’, स्यूडो सेकुलर और मुस्लिमपरस्त बताते रहे हैं, मगर पहली बात एसपी सरकार को सुन्नीपरस्त बताया जा रहा था।


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