गुरविंदर सिंह मूलतः पंजाब के होशियारपुर जिले के बस्सी मारूफ सिाला नामक ग्राम के रहने वाले हैं। उनके पिता जी डी ए वी महाविद्यालय पेहोवा जिला कुरुक्षेत्र , हरयाणा में कार्यरत हैं । अतः गुरविंदर कुरुक्षेत्र मैं ही रहते रहें हैं । वह बचपन से स्कूल में भंगड़े में भाग लिया करते थे । उन्हें पंजाबी गानों में बचपन से रूचि हैं और वह स्वयं भी पंजाबी गीत लिखते हैं । गुरविंदर सदैव से गायन को पेशे के रूप में लेना चाहते थे । किंतु अपनी माता जी की आज्ञा मानते हुए जी.बी.एन गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक,नेलोखिरी , जिला करनाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया ।वहाँ गुरविंदर युवा महोत्सवों में गाया करते थे। 2013 जनवरी में पी. आई. इ.टी., पानीपत में 1000 लोगों के बड़े समूह समक्ष गायन का प्रथम अवसर प्राप्त हुआ । सरदार गुरविंदर सिंह अब गुडगाँव की एक दोपहिया कम्पनी में काम करते हैं । और वह सप्ताहांत में प्रदीप अडवाणी इंस्टिट्यूट ऑफ़ परफार्मिंग आर्ट्स , अमरकोलोनी ,लाजपत नगर , नई दिल्ली से संगीत की शिक्षा लेते हैं । यद्यपि वह स्वीकार करते हैं की उनका अभी के लिए रोज़गार अभियांत्रिकी में ही हैं , परन्तु पंजाबी लोक संस्कृति की सेवा करने हेतु संगीत सीख रहें हैं । वह स्वयं पंजाबी गीत भी लिखते है । सरदार गुरविंदर सिंह एक अच्छा पंजाबी लोक गायक और पंजाबी गीतकार बनना चाहते हैं । वह पंजाबी गीत लेखन और गायन के माध्यम से पंजाबी संस्कृति की सेवा करना चाहते हैं तथा संगीत के क्षेत्र में सफल होने पर अभियांत्रिकी को छोड़ देना चाहते हैं
गायन के माध्यम से पंजाबी संस्कृति की सेवा करना चाहते हैं गुरविंदर सिंह
गुरविंदर सिंह मूलतः पंजाब के होशियारपुर जिले के बस्सी मारूफ सिाला नामक ग्राम के रहने वाले हैं। उनके पिता जी डी ए वी महाविद्यालय पेहोवा जिला कुरुक्षेत्र , हरयाणा में कार्यरत हैं । अतः गुरविंदर कुरुक्षेत्र मैं ही रहते रहें हैं । वह बचपन से स्कूल में भंगड़े में भाग लिया करते थे । उन्हें पंजाबी गानों में बचपन से रूचि हैं और वह स्वयं भी पंजाबी गीत लिखते हैं । गुरविंदर सदैव से गायन को पेशे के रूप में लेना चाहते थे । किंतु अपनी माता जी की आज्ञा मानते हुए जी.बी.एन गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक,नेलोखिरी , जिला करनाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया ।वहाँ गुरविंदर युवा महोत्सवों में गाया करते थे। 2013 जनवरी में पी. आई. इ.टी., पानीपत में 1000 लोगों के बड़े समूह समक्ष गायन का प्रथम अवसर प्राप्त हुआ । सरदार गुरविंदर सिंह अब गुडगाँव की एक दोपहिया कम्पनी में काम करते हैं । और वह सप्ताहांत में प्रदीप अडवाणी इंस्टिट्यूट ऑफ़ परफार्मिंग आर्ट्स , अमरकोलोनी ,लाजपत नगर , नई दिल्ली से संगीत की शिक्षा लेते हैं । यद्यपि वह स्वीकार करते हैं की उनका अभी के लिए रोज़गार अभियांत्रिकी में ही हैं , परन्तु पंजाबी लोक संस्कृति की सेवा करने हेतु संगीत सीख रहें हैं । वह स्वयं पंजाबी गीत भी लिखते है । सरदार गुरविंदर सिंह एक अच्छा पंजाबी लोक गायक और पंजाबी गीतकार बनना चाहते हैं । वह पंजाबी गीत लेखन और गायन के माध्यम से पंजाबी संस्कृति की सेवा करना चाहते हैं तथा संगीत के क्षेत्र में सफल होने पर अभियांत्रिकी को छोड़ देना चाहते हैं

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