- बात 1999 दिसंबर की है। अखिलेश यादव की इसी साल 24 नवंबर को डिंपल से शादी हुई थी।
- दिसंबर में दोनों देहरादून में शॉपिंग करने में बिजी थे।
- इसी बीच मुलायम सिंह ने उन्हें फोन करके कहा, ''वापस आ जाओ तुम्हें चुनाव लड़ना है।''
- बता दें, मुलायम नहीं चाहते थे कि अखिलेश कभी राजनीति में आएं।
- लेकिन जनेश्वर मिश्रा, जोकि सीनियर सपा लीडर और मुलायम के खास सहयोगी हुआ करते थे, उन्होंने अखिलेश को राजनीति में उतारने की सलाह दी थी।
इस देश में मनाने वाले थे हनीमून
- अखिलेश ने बताया था, मीडिया में मेरे पॉलिटिक्स में आने की खबरें चल रही थीं, लेकिन मेरा कोई इरादा नहीं था।
- मैंने डिंपल के साथ 1999 दिसंबर में क्रिसमस के मौके पर लंदन या सिडनी जाने का प्रोग्राम बनाया था।
- पिता के फोन के बाद मैं कुछ नहीं कह सका, क्योंकि उनका फैसला परिवार में अंतिम माना जाता है।
- उस एक फोन के बाद मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
- साल 2000 की शुरुआत में हुए उपचुनाव में मैं कन्नौज से सांसद बन गया।
फिर कभी हनीमून पर नहीं जा सके
- वहीं, डिंपल यादव कहती हैं कि हम कभी हनीमून पर नहीं जा पाए।
- एक के बाद एक चुनाव होते चले गए और यह प्रोग्राम हमेशा के लिए कैंसिल हो गया।
- कन्नौज से उपचुनाव के लिए अखिलेश ने अपना पहला नामांकन 17 फरवरी 2000 को भर दिया था।
1999 लोकसभा का उपचुनाव लड़ना था
- 1999 में हुए लोकसभा चुनावों में मुलायम 2 जगह से चुनाव लड़े थे।
- कन्नौज में 79,139 वोट मिले थे, जबकि संभल में 1,15,834 वोट मिले थे।
- उस समय मुलायम ने कन्नौज की पारंपरिक सीट छोड़ी थी।
- ऐसे में कन्नौज से परिवार के किसी सदस्य को उतारने की मांग हुई।
- जनेश्वर मिश्रा के कहने पर अखिलेश को मैदान में उतरना पड़ा था।
सिर्फ 3 लाइन का भाषण देते थे अखिलेश
- कन्नौज के पुराने सपा नेता गुड्डू सिंह बताते हैं, भैया जी (अखिलेश) को शुरू में खूब मेहनत करनी पड़ी।
- शुरुआत में वह सिर्फ 3 लाइन का भाषण दिया करते थे।
- भाषण में वह सिर्फ यही कहते थे, "मैं राजनीति में नया हूं और मैंने कन्नौज के लोगों की सेवा का फैसला किया है। आपसे वादा करता हूं कि मैं ये जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी के साथ निभाऊंगा।"
भाषण देने से ज्यादा लोगों से मिलते थे
- अखिलेश कहते हैं, मैं भाषण देने से ज्यादा लोगों से मिलता था।
- बातचीत में मुहावरों का प्रयोग किया करता था।
- घरों में जाकर महिलाओं को नमस्ते, बड़ों के पैर छूता और नौजवानों से हाथ मिलाता था।
- डिंपल भी नई परिस्तिथि के अनुसार ढल गईं और उन्होंने भी मेरा पॉलिटिक्स में आना स्वीकार कर लिया था।
- उपचुनाव में अखिलेश को कड़ी टक्कर बसपा के डम्पी ने दी थी।
- अखिलेश को 3,06,054 और बसपा को 2,47,329 वोट मिले थे। हार-जीत का अंतर सिर्फ 58,725 वोटों का था।


Post a Comment