JNU देशद्रोह मामलाः बड़ा खुलासा, दिल्ली पुलिस ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से कभी नहीं किया संपर्क


जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में देश विरोधी नारे लगाने के मामले में आरटीआई से एक अहम बात पता चली है। जो दिल्ली पुलिस की जांच को कठघरे में खड़ा सकती है। दिल्ली पुलिस ने जम्मू व कश्मीर के करीब आधे दर्जन छात्रों को अपनी जांच की जद में लिया था।
आरटीआई के जरिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस ने इस बारे में कभी कोई पत्राचार नहीं किया और न ही इस मामले में कोई जानकारी मांगी। उनका कहना है कि इससे संबंधित कोई जानकारी जम्मू-कश्मीर पुलिस के पास नहीं है।
अमर उजाला को मिले दस्तावेजों के मुताबिक जेएनयू प्रकरण से संबंधित जम्मू व कश्मीर पुलिस मुख्यालय (श्रीनगर) को आरटीआई आवेदन 6 सितंबर को मिला।
द‌िल्ली पुल‌िस ने खुद तक सीम‌‌ित रखी जांच
इस आवेदन में मुख्यालय से पूछा गया था कि क्या जेएनयू में फरवरी 2016 में घटित देश विरोधी नारों के मामले में दिल्ली पुलिस से किसी भी प्रकार का पत्राचार हुआ है। क्या इस बारे में कोई कार्रवाई की गई है।

अक्टूबर के पहले सप्ताह में जम्मू व कश्मीर पुलिस मुख्यालय (श्रीनगर) के जनसूचना अधिकारी कुलबीर सिंह ने जवाब में लिखा है कि इस संबंध में हमारे पास कोई जानकारी नहीं और न ही किसी प्रकार के कोई दस्तावेज हैं।
आरटीआई दस्तावेजों से साफ जाहिर होता है कि दिल्ली पुलिस ने देशद्रोही जैसे गंभीर मामले में आरोपियों की पृष्ठभूमि की जांच के लिए जम्मू व कश्मीर पुलिस से संपर्क करना भी मुनासिब नहीं समझा।
9 फरवरी को नकाबपोशों ने लगाए थे देशव‌िरोधी नारे
गौरतलब है कि जेएनयू परिसर में 9 फरवरी को कुछ छात्रों ने प्रशासन से सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ली थी। इसमें देश विरोधी नारे लगाए जाने के कुछ वीडियो सामने आए, जिसमें कुछ चेहरा ढके हुए छात्र देश विरोधी नारे लगा रहे थे।
इस मामले में कन्हैया और उमर खालिद को जेल हुई थी लेकिन बाद में इन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। दिल्ली पुलिस का मानना है कि नकाब पोश छात्र जम्मू व कश्मीर प्रदेश के रहने वाले थे। अगस्त माह में ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब आधा दर्जन जम्मू व कश्मीर के छात्रों से पूछताछ की थी।
यह मामला लगभग दस माह पुराना हो गया है। लेकिन हैरत की बात यह है कि दिल्ली पुलिस ने इन छात्रों पर देशद्रोह का आरोप तो लगा दिया लेकिन इनके पृष्ठभूमि की जांच के लिए इनके घर तक नहीं पहुंची।

जेएनयू प्रशासन ने किया था इंकार-
एक अन्य आरटीआई से पता चला था कि जेएनयू प्रशासन की जांच रिपोर्ट में किसी भी छात्र या अन्य व्यक्ति ने चीफ प्रॉक्टर के ऑफिस में इस बात की शिकायत नहीं कि जेएनयू कैम्पस में किसी ने भी देशद्रोही नारे लगाए। जबकि सीसीटीवी कैमरे, छात्र, मौके पर मौजूद सिक्यूरिटी गार्ड से पूछताछ करने के बाद ही जेएनयू ये रिपोर्ट तैयार की थी।