सीएम साहब, आपकी योजना के चक्कर में छात्रों के दो साल खराब हो गए



इंदौर, कुलदीप भावसार। दसवीं की परीक्षा में फेल हुए छात्रों को अवसाद में जाने से रोकने के लिए जोर-शोर
से शुरू हुई 'रुक जाना नहीं' योजना भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बन गई। मुख्य परीक्षा में फेल हुए हजारों छात्र इस योजना में राज्य ओपन बोर्ड से दोबारा परीक्षा देकर पास हुए, लेकिन माध्यमिक शिक्षा मंडल उन्हें पास नहीं मान रहा।

पहले छात्रों का एक साल बिगड़ा था। योजना में शामिल होने से दूसरा साल भी बिगड़ गया। छात्रों के सामने अगले साल दसवीं की परीक्षा देने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है।अपने रिजल्ट से निराश विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद सरकार ने ऐसे छात्रों के लिए उक्त योजना लागू की थी।




इसमें इन छात्रों को राज्य ओपन बोर्ड के माध्यम से उन विषयों की दोबारा परीक्षा देना थी जिनमें वे फेल हो गए हैं। दावा किया गया था कि दूसरी बार की परीक्षा में पास होने पर छात्रों को 11वीं में एडमिशन दे दिया जाएगा। पिछले साल दसवीं की परीक्षा का परिणाम मई-2016 में आया था। इसमें फेल हुए छात्रों के लिए जुलाई-2016 में 'रुक जाना नहीं" योजना में परीक्षा आयोजित की गई थी। इसका रिजल्ट अगस्त 2016 में आया था।

बोर्ड बदलने से आई दिक्कत


दसवीं की परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल आयोजित करता है, जबकि रुक जाना नहीं योजना में परीक्षा राज्य ओपन बोर्ड ने ली थी। बोर्ड बदलने की स्थिति में सरकार को इस संबंध में आदेश जारी करना होता है, ताकि रिजल्ट लिंक हो सकें।

योजना लागू करने के बाद सरकार ऐसा करना ही भूल गई। इसी कारण इस योजना में पास हुए छात्रों को मंडल ने न तो 10वीं पास माना और न एडमिशन मिला। सरकार की लापरवाही से हजारों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इन छात्रों ने मंडल की सामान्य फीस के मुकाबले तीन गुना फीस जमा कर परीक्षा दी थी।

नहीं हो सका एडमिशन


हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक किसी छात्र को 12 अगस्त के बाद एडमिशन नहीं दिया जा सकता। रुक जाना नहीं योजना का रिजल्ट इस तारीख के बाद आया था। इसी कारण इन छात्रों का एडमिशन नहीं हो सका। बोर्ड बदलना भी इसकी एक बड़ी वजह है। यह सही है कि छात्रों के दो साल खराब हो गए हैं। उमेशकुमार ठाकुर उप सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल

विसंगति दूर करेंगे...


बच्चों का साल खराब नहीं हुआ है। बतौर प्राइवेट परीक्षार्थी वे परीक्षा दे सकते थे। फिर भी यदि विसंगति सामने आ रही है तो उसे दूर किया जाएगा। दीपक जोशी, स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री