जनधन खातों में 7 दिन में बढ़े 1000 Cr, 4 महीने बाद थमा विद्ड्रॉअल का सिलसिला

नई दिल्ली. जनधन अकाउंट्स से पैसे विद्ड्रॉअल करने का सिलसिला पिछले चार महीने में पहली बार थमा है। 29 मार्च से 5 अप्रैल के बीच इनमें 1000 करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। बता दें कि नोटबंदी के दौरान इन खातों में तेजी से बैलेंस बढ़ा था। इसके बाद 7 दिसंबर से इनसे विद्ड्रॉअल का सिलसिला शुरू हुआ था। फाइनेंस मिनिस्ट्री के डाटा से मिली जानकारी...

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक फाइनेंस मिनिस्टरी के डाटा के मुताबिक फिलहाल इन अकाउंट्स में 63971.38 करोड़ रुपए जमा हैं। 29 मार्च तक थे यह अमाउंट 62972.42 करोड़ रुपए था।
- पिछले साल 7 दिसंबर को इन अकाउंट्स में सबसे ज्यादा 74610 करोड़ रुपए थे।
- देशभर के जनधन खातों में नोटबंद के बाद 9 नवंबर 2016 तक 45636.61 करोड़ रुपए जमा थे।
- नोटबंदी के बाद नए जनधन अकाउंट्स में भी तेजी से इजाफा हुआ।
- 8 नवंबर को देशभर में इनकी तादाद 13.68 करोड़ थी। इस वक्त देश में 28.23 करोड़ जनधन अकाउंट्स हैं। इनमें से 18.50 करोड़ आधार से जुड़े हैं। 

b7 दिसंबर के बाद से कम हो रहा था बैलेंस
- देशभर के जनधन अकाउंट्स में सबसे ज्यादा बैलेंस 74610 करोड़ रुपए पिछले साल 7 दिसंबर को था। इसके बाद से इसमें लगातार कमी आ रही थी।
- पीएमजेडीवाय के मुताबिक, 7 दिसंबर के बाद से वीकली बेसिस पर देखा जाए तो इन अकाउंट्स के कुल बैलेंस में पहली बार 5 अप्रैल को बढ़ोत्तरी हुई है।

नोटबंदी के बाद जनधन अकाउंट्स में अचानक बढ़ा पैसा
- बता दें कि पिछले साल 8 नवंबर को सरकार ने नोटबंदी का एलान किया था। इसके बाद से देशभर के जनधन अकाउंट्स में बैलेंस बढ़ना शुरू हुआ था। 
- जनधन अकाउंट्स में डिपॉजिट की मैक्सिमम लिमिट 50000 रुपए तय की गई थी। 
- इसके बाद सरकार ने लोगों को हिदायत दी थी कि बंद हो चुके 500-1000 के नोटों को जमा करने के लिए अपने अकाउंट्स का गलत इस्तेमाल न होने दें। अगर कोई दोषी पाया गया तो उसे इनकम टैक्स एक्ट के तहत सजा हो सकती है।
- सरकार को शिकायतें मिली थीं कि कुछ लोग ब्लैकमनी ठिकाने लगाने के लिए दूसरों के जनधन खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं।