पाकिस्तान में यशपाल को मिलती थी ढाई रोटी और..सिर्फ मार

पाकिस्तान की जेल में तीन साल तक पढ़ेरा के यशपाल ने जमकर यातनाएं झेलीं। हर रोज ढाई रोटी महज जीने भर के लिए दी जाती थी। एक सुबह के समय मिलती थी और डेढ़ रोटी शाम की खुराक में होती। इतने भर के बाद भी सुबह-शाम और दोपहर पड़ती थी मार। इतनी मार कि अच्छा-खासा व्यक्ति भी पागल हो जाए। रोजाना की मार से यशपाल इतना सहमा हुआ है कि उसमें आज सोचने-समझने की मनोस्थिति बाकी नहीं रह गई है। उसकी याददाश्त भी गुम हो चुकी है। बेशक, अब धीरे-धीरे वह सामान्य हो जाए, लेकिन पाकिस्तान में मिली मार और उपेक्षा के दंश उसके दिलो-दिमाग में हमेशा हरे रहेंगे।
पाकिस्तान की जेल में तीन साल बिताकर रिहा हुआ यशपाल जब बाघा बॉर्डर पर अपने पिता बाबूराम से मिला तो मिलते ही उसके दिल में हूंक-सी उठी। पाक में मिलने वाली यातनाओं के जख्म और इतने वर्षो बाद कोई अपना जब मिलता है तो उसकी सुखद अनुभूति शब्दों में बयां नहीं की जा सकती, सिर्फ महसूस की जा सकती है। बाप-बेटे ने एक-दूसरे को गले लगाया। गुमसुम से बेटे के दर्द को बाप ने दिल से महसूस किया और बरेली लौटते समय रास्ते में उसे कुरेदा तो पाकिस्तान में जुल्म की इंतहा का खौफनाक तस्वीर बयां हुई।
बाबूराम ने बताया कि यशपाल ने लंबी बातचीत में उनसे बहुत कुछ कहा। बताया कि उस पर वहां की जेल में क्या-क्या जुल्म ढहाए गए। उसके मुंह से उसका हाल सुनकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। बकौल बाबूराम, यशपाल बता रहा था कि जेल के अफसर उसे जमकर पीटते थे। वह कहते थे यह इंडियन है। इसे मारो। सुबह एक रोटी देते थे, उससे पहले जमकर पीट लेते थे। शाम को दोबारा जब डेढ़ रोटी मिलती थी तो उसे खाते वक्त मार पड़ती थी। यह बताते हुए बाबूराम की आंखें छलछला उठीं। बोले, पाकिस्तान में यशपाल को इतनी मार पड़ी है कि वह पहले जैसा नहीं रह गया है। पहले वह खूब खुलकर बोला करता था, लेकिन अब सहमा है, डरा हुआ है। भगवान से दुआ है कि वह बहुत जल्द पहले जैसा हो जाए।