अपने
दादा पं. शंकर लाल मिश्रा से 15 साल शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने वाली सुगंधा मिश्रा
ने अपने करियर की शुरुआत आरजे बनकर की। आरजे रहते हुए उन्हें ऑडिशन के जरिए 'लाफ्टर
चैलेंज' के लिए चुना गया। उसके बाद वह 'सा रे गा मा पा' की रनर-अप बनीं। कई फिल्मों
में प्लेबैक करने के साथ कुछ टीवी शोज में ऐक्टिंग और एंकरिंग करने वाली सुगंधा जल्द
ही बड़े परदे पर भी नजर आएंगी।
स्टैंड-अप
कॉमिडी, एंकरिंग और ऐक्टिंग में भी हाथ आजमाने वाली सुगंधा खुद को पहले सिंगर ही मानती
हैं। रोटरी क्लब के फंक्शन में शामिल होने के लिए लखनऊ आईं सुगंधा से लखनऊ टाइम्स मसाला
मिक्स की खास बातचीत:
'मैं
पहले एक सिंगर हूं'
'लाफ्टर
चैलेंज' में जाना हो या फिर फिल्म में काम करना मैंने कुछ भी प्लान नहीं किया था। मैंने
जब भी अप्रोच किया एक सिंगर के तौर पर ही किया। मैं खुद को हमेशा बतौर सिंगर ही पेश
करती हूं, लेकिन मुझे अगर कोई अच्छा ऑफर मिलता है तो मैं उसे स्वीकार कर लेती हूं।
संगीत मेरे खून में है। मैं अपनी फैमिली में चौथी पीढ़ी हूं जो इस परम्परा को आगे बढ़ा
रही हूं। इंदौर घराना है हमारा। आजकल संगीत तो मिल जाता है, लेकिन गुरु नहीं। मैं खुशनसीब
हूं कि मुझे गुरु के रूप में मेरे दादा जी जैसे महान कलाकार मिले।'
'कपिल
शर्मा हमारे कॉलेज सीनियर थे'
'मैंने
पंजाब में आरजे की जॉब से शुरुआत की थी क्योंकि मुझे कुछ अलग करना था। मुम्बई के लिए
तो घर में खास पाबंदी थी। दादा-दादी मुंबई जाने के सख्त खिलाफ थे। जिस कॉलेज में हम
थे उसी में कपिल भैया (कपिल शर्मा) हमसे एक साल सीनियर थे। 'लाफ्टर चैलेंज' शो के लिए
उन्होंने हमारे बैच के कुछ लोगों का नाम बताया था। फिर शो वाले पंजाब में हमारे कॉलेज
में ऑडिशन के लिए आए। ऑडिशन में मैं, भारती और कुछ और लोग भी सिलेक्ट हुए थे। इसके
बाद 'सा रे गा मा पा' और फिर कई फिल्मों में गाने का मौका भी मिला। कुछ शो भी होस्ट
किए। जब मेरे सामने 'हीरोपंती' मूवी का ऑफर आया तो मैं वहां भी गई। मैंने स्क्रिप्ट
सुनी काफी अच्छी लगी। इस फिल्म में मेरा एक चुलबुली लड़की का किरदार है। अगर कुछ अच्छा
है तो मैं किसी ऑफर के लिए मना नहीं करती हूं क्योंकि मैं एक एंटरटेनर भी हूं।'


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