अर्जुन कपूर लड़कियों के मामले में चूजी हैं। वह कहते
हैं कि उनकी पसंद बहुत अलग है। फिलहाल तो वह अपनी आने वाली फिल्म 'गुंडे' में रणवीर
सिंह और प्रियंका चोपड़ा के साथ नजर आने वाले हैं। करते हैं उनसे कुछ बातें...
इतनी अच्छी हिंदी आप कैसे बोल लेते हैं?
मेरी हिंदी बचपन से ही बहुत अच्छी रही है। बचपन से अपने
ग्रैंड पैरंट्स से और घर पर आने-जाने वाले लोगों से हिंदी में ही बात करता था। स्कूल
में भी हिंदी मुझे बहुत अच्छी लगती थी। अब हिंदी फिल्मों में काम कर रहा हूं। अगर आप
उस भाषा के जानकार हैं, तो आपके इमोशन भी बहुत अच्छी तरह निकल कर आते हैं। हालांकि,
मुझे अपनी पहली ही फिल्म की स्क्रिप्ट रोमन में मिली थी इसलिए अब देवनागरी स्क्रिप्ट
की आदत नहीं बनी। मेरी आने वाली फिल्म 'तेवर' में कुछ एक सीन मैंने देवनागरी में पढ़कर
याद करने की कोशिश की है।
फिल्म 'गुंडे' में आपका किरदार क्या है?
यह फिल्म दो दोस्तों की कहानी है। जिस तरह सत्तर के
दशक में फिल्में बनती थीं, उसी तरह की फिल्म है यह। इसमें मेरा किरदार दिमाग से नहीं,
दिल से सोचता है। बहुत गुस्सैल है और पंगे लेता रहता है। हर चीज में थोड़ा एक्स्ट्रीम
है।
प्रोमो में दिख रहा है कि आप और रणवीर दोनों एक ही लड़की
के प्यार में पड़े हैं। क्या रियल लाइफ में ऐसा हुआ है?
रियल लाइफ में ऐसा हुआ, तो प्रॉब्लम होगी। लेकिन मैं
लड़कियों के मामले में बहुत चूजी हूं। इस मामले में मेरी पसंद बहुत अलग है। ऐसा कभी
नहीं हुआ कि मेरी और मेरे करीबी दोस्तों की पसंद एक जैसी रही हो। वैसे भी दोस्तों में
जब एक दोस्त की नजर किसी पर पड़ गई, तो दूसरा उसे नजर उठाकर नहीं देखता।
'सलाम ए इश्क' में आपने एडी के तौर पर काम किया। तब
से आप प्रियंका को जानते हैं। कितना आसान रहा, उनके साथ काम करना?
'सलाम ए इश्क' में मैंने असिस्ट किया है। तब मैं प्रियंका
को शॉट के लिए बुलाता था और अब मैं उनके साथ शॉट दे रहा हूं। तब से ही उन्हें जानता
हूं, तो एक कंफर्ट लेवल तो था ही। लेकिन उन्होंने सेट पर कभी यह अहसास नहीं होने दिया
कि वह हमसे इतनी सीनियर हैं। जबकि मेरा और रणवीर दोनों को मिलाकर भी इतना एक्सपीरियंस
नहीं है, जितना उन्हें अकेली को है। प्रियंका वाकई बहुत टैलंटेड हैं और खूबसूरत भी।
उनके साथ काम करने पर हमारी परफॉरमेंस की रेंज भी बढ़ गई।
जब आपको सोलो ऐक्टर के तौर पर फिल्में मिल रही थीं,
तो मल्टिस्टारर फिल्म करने की क्या जरूरत पड़ी?
मेरा मानना है कि फिल्म में ऑडियंस जितने ज्यादा चेहरे
देखती है, उतना ही उसे एक्साइटमेंट होता है। 'औरंगजेब' भी मल्टिस्टारर फिल्म थी, मगर
सभी ऐक्टर्स कमाल के थे। 'गुंडे' में भी हमारी जोड़ी लोगों को फ्रेश लग रही है। मीडिया
के हिसाब से तो मैं और रणवीर सो-कॉल्ड कॉम्पिटिटर हैं, फिर भी साथ आ रहे हैं। वैसे
भी स्टार का टैग आपको तब मिलता है, जब आप दस-पंद्रह साल तक लगातार सफल फिल्में देते
रहें। अभी तो हमारी शुरुआत है, तो जो फिल्में मुझे पसंद आती हैं, उन्हें मैं करता हूं।
मुझे प्रेशर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का नहीं, बल्कि अपने टैलंट को और इंप्रूव करने का है।
आप एक प्रड्यूसर के बेटे हैं। क्या आपको लगता है कि
लोग आपके काम से ज्यादा आपके सरनेम को महत्व देते हैं?
मेरे करियर की पहली तीन फिल्में यशराज ने बनाई हैं,
न कि पापा ने। चार फिल्में दूसरे बैनर के साथ करने के बाद मैं पांचवीं फिल्म पापा के
साथ कर रहा हूं। ऐसे में उनका इंफ्लुएंस कैसे हो सकता है! अक्षय कुमार, शाहरुख खान
और रणवीर सिंह जैसे ऐक्टर्स फिल्म बैकग्राउंड से नहीं रहे, फिर भी अपना मुकाम बनाया।
वहीं, कई ऐसे लोग हैं जो प्रड्यूसर-डायरेक्टर के बेटे होने के बाद भी आए और चले गए।
आज किसको याद है कि अजय देवगन वीरू देवगन के बेटे हैं, रितिक राकेश रोशन के और सलमान
सलीम खान के। हमारी ऑडियंस बहुत सेंसिबल है और यहां सरनेम नहीं आपका टैलंट चलता है।
आप फिल्में साइन करने से पहले अपने पापा की राय लेते
हैं?
हां, मैं उनकी राय लेता हूं और मैं लकी हूं कि पापा
और मेरी चॉइस लगभग एक जैसी है। 'फाइंडिंग फैनी' इंग्लिश फिल्म थी, लेकिन मुझसे ज्यादा
पापा इसके लिए एक्साइटेड थे।
आपको नहीं लगता कि आपकी इमेज एक ऐक्शन हीरो की बनती
जा रही है?
क्या करूं, लोगों को मेरे हाथों में बंदूक पसंद आती
है! मेरी लगातार ऐसी फिल्में रिलीज हुईं, जो ऐक्शन हीरो वाली थीं। 'इशकजादे' में दाढ़ी
के लुक और ऐक्शन ने मेरी ऐसी ही इमेज बना दी। अब 'गुंडे' में भी मैं फिल्मी ऐक्शन करते
नजर आऊंगा। लेकिन मुझे उम्मीद है कि 'टू स्टेट्स' से मेरी इमेज बदलेगी। इस फिल्म में
मैं चश्में में और क्लीन शेव हूं, जो बंदूक नहीं किताबें लेकर घूमता है।
आलिया के साथ आपके लिंक अप की खबरे आ रही हैं। कैसे
हैंडल करते हैं इन चीजों को?
इंडस्ट्री में होने की यह एक बहुत ही छोटी-सी कीमत है,
जो हम सभी को चुकानी पड़ती है। मेरी और आलिया की गाड़ी संयोग से ही उस दिन साथ पहुंची
थी। अब मैंने उनके साथ काम किया है, तो उन्हें छोड़कर भाग तो नहीं जाऊंगा। इसलिए मैं
और वह साथ ही अंदर गए। इसमें भी मीडिया ने अपने हिसाब से स्टोरी चला दी कि साथ में
आए और साथ में गए। मैंने सोचा कि बात साफ कर दूं। फिर लगा कि कब तक मैं सफाई देता रहूंगा।
अब मैं इन चीजों को तवज्जो नहीं देता। जब असल में कुछ होगा तो मैं खुद ही इस बारे में
बता दूंगा।


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