पाकिस्तानी
ऐक्टर और सिंगर अली जफर ने अब बॉलिवुड में भी अपनी अलग पहचान बना ली है। जल्द ही उनकी
फिल्म 'टोटल सियापा' रिलीज हो रही है। अली ने न सिर्फ इसमें ऐक्टिंग की है, बल्कि फिल्म
का म्यूजिक भी कंपोज किया है। अली से एक खास बातचीत...
खुद की
इंडस्ट्री में एक जगह बनाना कितना मुश्किल है?
काफी
मुश्किल है। मेरा मानना है कि इंडस्ट्री में बहुत काम है और सबको अपने हिस्से का काम
मिल ही रहा है। तो आपका हिस्सा भी आपको मिलेगा। कोई आपसे छीन नहीं सकता।
यहां
किसके साथ काम करने की ख्वाहिश है?
सलमान
खान और शाहरुख खान पाकिस्तान में बहुत पॉप्युलर हैं। अगर मौका मिला, तो उनके साथ जरूर
काम करना चाहूंगा।
रियल
अली कैसे हैं?
रियल
में मैं बहुत ही सिंपल इंसान हूं। जींस टीशर्ट पहनना अच्छा लगता है और आलू मेथी की
सब्जी पसंद है। अपने परिवार के साथ टाइम बिताना भी अच्छा लगता है। मेरा मानना है कि
आपको एक ही लाइफ मिली है और इसमें सब कुछ कर लेना चाहिए। मुझे आर्ट की हर फील्ड अच्छी
लगती है। उम्र में खुद से बड़े और इंटलेक्चुलअ लोगों के साथ बातें करने में मजा आता
है। शेरो-शायरी अच्छी लगती है। मुझे लाइम लाइट में जाने का बहुत शौक नहीं है। पार्टीज
मैं अवॉइड करता हूं।
'टोटल
सियापा' में आपका किरदार क्या है?
इस फिल्म
में मैं एक पाकिस्तानी लड़के अमन का किरदार निभा रहा हूं, जो लंदन में रहता है और उसे
हिंदुस्तानी लड़की से प्यार हो जाता है। जब लड़की के घर पर यह पता चलता है, तो वहां
काफी प्रॉब्लम्स होती हैं। यह एक सिचुएशनल कॉमिडी है।
आप खुद
भी पाकिस्तान से हैं, तो यह किरदार कितना आसान रहा आपके लिए?
मैं पाकिस्तान
से हूं, तो आसानी से किरदार के साथ रिलेट कर पाया। दूसरी बात मेरे लिए लैंग्वेज की
आसानी हो गई। वहां के लड़के जैसा बोलते हैं और सोचते हैं, वह सब मैं किरदार में जोड़
पाया।
इंडिया
में काम करने का अब तक का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
आर्टिस्ट
के तौर पर मेरा एक्सपीरियंस बहुत अच्छा रहा। यहां के लोगों ने मुझे बहुत प्यार और इज्जत
दी है। जब भी यहां लोगों से मिलता हूं, तो उनका रिऐक्शन बहुत अच्छा होता है। शुरुआत
की तीन फिल्में बॉक्स ऑफिस हिट रहीं।
क्या
पाकिस्तान में भी लोग आपकी इस अचीवमेंट से खुश हैं?
वहां
के लोग भी बहुत खुश हैं कि बॉलिवुड में मैंने एक जगह बनाई है। वहां पर इंडियन फिल्मों
और ऐक्टर्स का काफी क्रेज है। ऐसे में उनके बीच अगर उनका कोई अपना खड़ा है, तो जाहिर
है उन्हें अच्छा लगेगा। लोगों को पता है कि कौन कैसा काम कर रहा है। वह जानते हैं कि
मैं अच्छे से काम कर रहा हूं, इसलिए वह मुझ पर प्राउड करते हैं। वहां जब लोगों से मिलता
हूं, तो वह कहते हैं कि यहां से कोई इतना आगे नहीं गया जितना तुम गए हो। वहां इतने
सितारे हैं और उनमें हमारा भी एक बंदा खड़ा है।
पहले
और अब की लाइफ में कितना अंतर आ गया है?
अब मैं
काफी निडर हो गया हूं। मुझमें किसी तरह की इनसिक्यॉरिटी नहीं है और न ही ईष्या है।
उम्र के साथ मैं काफी सुलझ गया हूं। कूल रहता हूं क्योंकि प्रेशर लेने से कोई फायदा
नहीं। अगर आप इस कॉम्पिटिशन में आ भी गए और नंबर वन भी बन गए, तो कल कोई न कोई आपका
रेकॉर्ड तोड़ने ही वाला है। तो क्या मतलब इन चीजों का! जितना जिसके नसीब में होगा उतना
तो मिलेगा ही।
आप सिंगर
हैं और ऐक्टर भी। दोनों प्रफेशन कैसे मैनेज करते हैं?
मुझे
दोनों कामों में ही मजा आता है। हालांकि, स्टूडियो में जब म्यूजिक कंपोज करता हूं,
तो बहुत अच्छा लगता है। ऐक्टिंग करते वक्त अच्छा लगता है, लेकिन उससे आगे और पीछे का
प्रोसेस पसंद नहीं।
एक आर्टिस्ट
के तौर पर पाकिस्तान में कितनी लिमिटेशंस में बंधे हैं आप?
वहां
पर लिमिटेशंस हैं। सोशल और रिलिजन बाउंड्रीज हैं, लेकिन टीवी और म्यूजिक में वहां भी
काम होता है। शादियों में परफॉरर्मेंस भी होते हैं। देखा जाए, तो म्यूजिक इंडस्ट्री
पूरी दुनिया में सफर कर रही है, तो पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री
तो वहां बनी ही नहीं। आप आर्टिस्ट हैं, तो आपको बॉलिवुड या इंटरनैशनल मार्केट की तरफ
देखना पड़ता है।
तो आप
इसके लिए क्या कर रहे हैं?
मैं वहां
की फिल्म इंडस्ट्री को रिवाइव करना चाहता हूं। अपनी पोजिशन का इस्तेमाल लोगों को करीब
लाने में करना चाहता हूं। यही वजह है कि मैं एक फिल्म प्लान कर रहा हूं। मैं आर्टिस्ट
हूं और मेरा काम सिर्फ एंटरटेनमेंट करना नहीं है। मेरी एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
म्यूजिक और फिल्म के तहत मैं वहां की इंडस्ट्री का रिवाइवल चाहता हूं।
क्या
आप हिंदुस्तान में सेटल होना चाहेंगे?
हिंदुस्तान
मेरा दूसरा घर है। मैं यहां बहुत ज्यादा वक्त गुजारता हूं, लेकिन सेटल तो मैं कहीं
नहीं हो सकता। दरअसल, मेरा एक हफ्ता लंदन में जाता है, तो दूसरा बैंकॉक में, तो तीसरा
हिंदुस्तान में। ऐसे में कहीं पर्मानेंट सेटल नहीं हुआ जा सकता।


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