
समकालीन नृत्य
जापान फाउंडेशन,नयी दिल्ली के एक नियमित कार्यक्रम सांस्कृतिक वार्ता श्रृंखला के अंतर्गत सुश्री योरिको माईनो की वार्ता और प्रदर्शन समकालीन नृत्य पर 22 अप्रैल 2014 को सायं 06:30 बजे रखा गया । कार्यक्रम का शीर्षक "फर्स्ट स्टेप टू कंटेम्पररी डांस - डांस एंड मी" था अर्थात "समकालीन नृत्य को प्रथम पग - नृत्य और मैं " । समकालीन नृत्य को अभिव्यक्ति का नृत्य कहा जाता हैं । वार्ता में भी सुश्री योरिको माईनो ने बताया " कंटेम्पररी डांस इज़ डांस ऑफ़ एक्सप्रेशन "। संचार के सामान्य नियमों के अनुसार, हर अभिव्यक्ति का एक विषय या अभिप्राय होना आवश्यक हैं । आप लोगों ने धारावाहिको में देखा होगा की होली के समय चित्रकार चित्र बन्ना रहा हैं और कोई उससे होली खेलने आता हैं तो वो उस चित्र को एक श्वेत पत्र से धक देता हैं । उस श्वेत पत्र पर पड़े रंगो के छींटो को उत्कृष्ट आधुनिक कला चित्र का पुरस्कार मिल जाता हैं । अर्थात यह प्रचलन सा होगया हैं की जो चित्र समज ना आए वो मॉडर्न आर्ट और जो नृत्य समज ना आए वो कंटेम्पररी डांस । एक मुद्रा में उनकी अभिव्यक्ति भगवान बुद्ध की होती हैं तो अगली भयानक पशु की । कार्यक्रम के पश्चात इस विषय पर जब उनसे पूछा गया तो सुश्री योरिको माईनो का कहना था की इस का कोई अभिप्राय नहीं हैं येह केवल आपकी कल्पना शक्ति के विस्तार के लिए हैं । अब आप स्वयं अनुमान लगये की यह कल्पना शक्ति का विस्तार हैं अथवा दिमाग की दही । इस पर और मजे की बात ये की समकालीन नृत्य के साथ समकालीन संगीत भी इतना मज़ेदार की क्या कहने ।भारतीय योगिक साधना करने वाले जापानी मूल के योगी बाबा श्रीमान युइची निशिकवा ने उज्जयी प्राणायाम (अर्थात खराटे की आवाज ) से सूर छेड़ा और माइक को पिट पिट के ताल दी ।

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