करण जौहर की पहली फिल्म ही दोस्ती और एकतरफा प्यार के दर्द के बारे में थी. 20 साल बाद वो उन्हीं थीम्स को छूते हैं, थोड़ी और मैच्योरिटी के साथ जो समय और उम्र के साथ आती है. नतीजा है, ‘ऐ दिल है मुश्किल’, जो साफ तौर पर करन जौहर की 2006 में आई एक्सट्रामैरिटल लव स्टोरी ‘कभी अलविदा ना कहना’ के बाद उनकी अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है.
फिल्म में होने वाला ड्रामा आपके दिल को छूता है और जिसकी सबसे बड़ी ताकत है- इसके दो लीड एक्टर्स का शानदार अभिनय. 80 के दशक के बॉलीवुड सॉग्स के लिए अपने प्यार से बंधे, लंदन में रहने वेल वनाबी सिंगर अयान यानी रणबीर कपूर और अलीज़ेह यानी अनुष्का शर्मा, एक पार्टी में मिलने के बाद गहरे दोस्त बन जाते हैं. दोनों का एक साथ अपने अपने पार्ट्नर्स से ब्रेकअप हो जाता है. अयान की अलीज़ेह से दोस्ती जल्द ही रोमांटिक अट्रैक्शन का रुख ले लेती है, पर अलीज़ेह का अयान के लिए अफेक्शन सिर्फ फ्रेंडशिप बन कर रह जाता है.
करीब ढाई घंटे में करण जौहर अपने प्रोटेगनिस्ट्स को खूब सारे एमोशन्स से गुज़ार कर ले जाते हैं, ये टेस्ट करने के लिए की आख़िर उनके बीच क्या है. फवाद खान के तौर पर एक्स ब्वॉयफ्रेंड सामने आते हैं तो ऐश्वर्या राय बच्चन के रूप में नए लवर्स भी सामने आते हैं और एक ऐसा विलन भी जिसे हराना नामुमकिन है.
कई जगहों पर ‘ऐ दिल है मुश्किल’ यश चोपड़ा की फिल्मों की रोमांटिक कॉप्लेक्सिटीज को उजागर करती है, वहीं ये फिल्म इम्तियाज अली की फिल्म ‘रॉकस्टार’ जैसी इंटेमसिटी को भी दर्शाती है. पर इस पूरी फिल्म में हर जगह करण जौहर की छाप देखी जा सकती है, इसके प्रिंसिपल करेक्टर्स के बीच विटी डायलॉग्स से लेकर, उनकी पिछली फिल्मों के कई रेफरेन्सेस (जो थोड़ा थका देते हैं), और सीरियस सिचुएशन्स में भी हंसी पैदा करने के उनके स्किल्स. इस नई फिल्म में मेच्योरिटी है, रियल और रिलेटेबल सिचुएशन्स और किरदार जो करण जौहर की पिछली फिल्मों में शायद गायब थे.
जाहिर तौर पर किरदार किसी फैशन मैग्जीन से निकले हुए लगते हैं और खूबसूरती पर अहम जोर दिया गया है. करण जौहर की फिल्म में म्यूज़िक हमेशा से ही अहम हिस्सा रहा है, और प्रीतम कुछ बेहतरीन ट्रैक्स देते हैं जो बहुत ही खूबी से फिल्म की कहानी से जोड़े गए हैं. लेकिन इस फिल्म से खुद को एंगेज रखने का तरीका है, इसके किरदारों से जुड़ना. ग्लैमरस लुक के साथ ऐश्वर्या राय बच्चन उर्दू पोएट के किरदार में उलझे हुए डाइलॉग्स बोलती हैं, पर वो अपने लिमिटेड स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ती हैं.
अपने एक सीन में, नम आंखों के साथ होने वाले कॉन्फ्रंटेशन में वो कम से कम लाइन्स के बावजूद बहुत कुछ कह जाती हैं. एक ट्रिकी कैरेक्टर में अनुष्का शर्मा सेल्फिश लग सकती थी पर वो अपने किरदार को प्रैक्टिकैलिटी के साथ भरते हुए यहां अपना बेस्ट काम करती हैं. पर वो रणबीर कपूर हैं, जो सारी तारीफें बटोर ले जाते हैं, एक ऐसे परफॉर्मेंस के साथ जो एक भी बीट मिस नहीं करता.
कॉमिकल से हार्टब्रोकन और फिर कन्फ्यूज़्ड होने तक, उनका चेहरा एमोशन्स का कैन्वस लगता है, और वो स्क्रीन पर आने वाले हर पल में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाते हैं. ये एक एक्सलेंट कम बैक है उस एक्टर के लिए जिन्हें अपनी पिछली नाकाम फिल्मों के लिए बहुत कुछ सुनना पड़ा.
ओकेजनली अपने ओवर-सेंटिमेंटल अंडरटोन्स और इमोशनल मैनिप्युलेशन के बावजूद, ‘ऐ दिल है मुश्किल’ आपको एक ऐसा हीरो देती है, जिसकी आप परवाह करेंगे. हो सकता है कि जब तक लाइट्स वापस ऑन होंगी, आप खुद को आंसुओं में पाएं. करन जौहर ऐसा करना बखूबी जानते हैं. ये वो स्किल है जो हमेशा से उनके साथ रही है. मैं ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को पांच में से साढ़े तीन स्टार देता हूं. अपनी आंखें नम करने के लिए तैयार रहिएगा.


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