पीएम मोदी से कहा- OROP को सार्थक तरीके से लागू करें, अपने कामों से सैनिकों को दिलाएं भरोसा


नई दिल्ली : राहुल गांधी ने सैनिकों के कल्याण के लिए काम करने के मोदी सरकार के संकल्प पर शनिवार को सवालिया निशान लगाते हुए प्रधानमंत्री से पहले ‘वन रैंक, वन पेंशन’ सार्थक तरीके से लागू करने तथा उनकी वेतन विसंगतियां एवं अन्य शिकायतों को हल करने को कहा।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि वह पिछले कुछ हफ्तों के दौरान सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को लेकर दुखी हैं क्योंकि ये फैसले सैनिकों को यकीन दिलाने से कोसों दूर हैं तथा इनसे उल्टे उन्हें पीड़ा ही हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा है कि दिवाली पर सैनिकों को ऐसा संदेश भेजने के लिए कदम उठाया जाना चाहिए जो कथनी एवं करनी में हमारा अभार व्यक्त करे।
प्रधानमंत्री ने एक अभियान शुरू किया है जिसके माध्यम से लोग देश की सीमाओं को रक्षा कर रहे सैनिकों का मनोबल उंचा उठाए रखने के लिए उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं भेज सकते हैं। प्रधानमंत्री इस बार उत्तराखंड में एक सुदूर सीमा चौकी पर आईटीबीपी के जवानों के साथ दिवाली मनायेंगे। कांग्रेस नेता ने लिखा है, हमारे सैनिकों द्वारा लक्षित हमला किये जाने के महज कुछ दिन बाद विकलांगता पेंशन प्रणाली नयी स्लैब व्यवस्था में बदल दी गयी। इससे कई दृष्टांतों में विकलांगता की स्थिति में इन बहादुर सैनिकों का पेंशन बहुत घट गया। राहुल ने प्रधानमंत्री से मांग की कि सैनिकों को मुआवजा, दिव्यांग पेंशन और अन्य मामलों में असैन्य कर्मचारियों के बराबर भुगतान किया जाना चाहिए।

राहुल ने कहा कि ओआरओपी पूर्व सैनिकों को संतुष्ट करने के लिए सार्थक तरीके से लागू किया जाना चाहिए तथा सातवें वेतन आयोग की विसंगतियां यथाशीघ्र दूर की जानी चाहिए क्योंकि सैनिकों को उस चीज का दावा करने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़े जो कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनके लिए देय है। प्रधानमंत्री ने पहले कांग्रेस पर महज 500 करोड़ चिह्नितकर ओआरओपी मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया था।

राहुल ने कहा कि एक जिम्मेदार राष्ट्र के तौर पर हमें यह पक्का करना चाहिए कि हमसभी के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाले बहादुर सैनिक 125 करोड़ लोगों का प्यार, समर्थन एवं आभार महसूस करें। उन्होंने कहा कि अतएव, मैं प्रधानमंत्री आपसे यह सुनिश्चित करने की अपील करता हूं कि चाहे मुआवजे की बात हो, या विकलांगता पेंशन या नागरिक कर्मचारियों के साथ समतुल्यता की बात हो हमारे सैनिकों को को उचित हक मिले। उन्होंने कहा कि सातवां वेतन आयोग रक्षाबलों को अब भी घाटे की स्थिति में रखे हुए तथा वह उनमें एवं नागरिक कर्मचारियों के बीच अंतर बढ़ाता है। पत्र में कहा गया है, चूंकि हम दिवाली मना रहे हैं, अंधेरे पर उजाले की जीत मना रहे हैं, अतएव हमें अपने सैनिकों को ऐसा संदेश भेजें कि हमारा आभार कथनी एवं करनी में दिखे। कम से कम इतना तो हमारी उनके प्रति जिम्मेदारी बनती है जो हमारा कल सुरक्षित रखने के लिए अपना आज कुर्बान कर देते हैं।