नई दिल्ली। दिसंबर
2001 में संसद
पर हुए
हमले में
दोषी ठहराए
गए अफजल
गुरू को
फांसी दे
दी गई
है। सुबह
8 बजे उसे
तिहाड़ जेल
नंबर तीन
में गुपचुप
तरीके से
फांसी दी
गई। (आखिरी
इच्छा के
तौर पर
अफजल ने
मांगी थी
कुरान) फांसी
पर लटकाए
जाने के
बाद उसे
डॉक्टरों ने
मृत घोषित
कर दिया।
इस दौरान जेल प्रशासन और
दिल्ली पुलिस
के चुनिंदा
अधिकारी ही
मौजूद रहे।
अफजल के
परिजनों को
इसकी जानकारी
दे दी
गई है।
फांसी के बाद अफजल का
शव तिहाड़
जेल में
ही दफना
दिया गया।
कुछ देर
में गृह
मंञी सुशील
कुमार शिंदे
इस संबंध
में पञकारों
को पूरी
जानकारी देने
के लिए
प्रेस कांफ्रेंस
कर रहे
हैं। (कसाब
को फांसी
पर लटकाने
का मेहनताना
केवल 50 रुपए!)
गृह मंञी सुशील
शिंदे ने
पञकारों को
जानकारी देते
हुए बताया
कि 21 जनवरी
को अफजल
गुरू की
फाईल राष्ट्रपति
के पास
भेजी गई
थी। बाद
में 3 फरवरी
को यह
फाईल रिजेक्ट
कर दी
गई और
फाईल वापस
गृह मंञालय
को भेज
दी गई।
शिंदे ने
कहा, 4 फरवरी
को मैने
अफजल की
फाईल पर
साईन कर
आगे की
कार्रवाई के
लिए उसे
भेज दिया।
बाद में
न्यायालय की
तरफ से
अफजल को
फांसी दिए
जाने के
लिए आठ
फरवरी को
सुबह आठ
बजे फांसी
दिए जाना
तय कर
दिया गया।
राष्ट्रपति
की तरफ
से दया
याचिका खारिज
होने के
बाद तीन
फरवरी को
गृह मंञालय
के पास
अफजल की
फाईल वापस
आ गई
थी। मुंबई
हमले के
दोषी कसाब
को फांसी
दिए जाने
के बाद
से अफजल
गुरू को
भी जल्द
फांसी दिए
जाने की
मांग उठने
लगी थी।
दिल्ली में
सुरक्षा कड़ी
कर दी
गई है।
उधर, एहतियातन
जम्मू-कश्मीर
में सुरक्षा
बढ़ा दी
गई है।
हालांकि अभी
इस संबंध
में औपचारिक
ऐलान होना
बाकी है।
केंद्रीय गृह
सचिव आर
के सिंह
ने इस
संबंध में
पुष्टि कर
दी है।
(पाकिस्तान में
विरोध)
सूञों के अनुसार,
जेल नंबर
तीन में
फांसी घर
में दी
गई। जेल
प्रशासन ने
सबसे पहले
ब्लैक वारंट
लिया। इसके
बाद अफजल
को फांसी
दिए जाने
के लिए
प्रशासन ने
तैयारी की।
इसमें स्थित
पांच कोठरियां
है। इससे
पहले बेअंत
और सतवंत
सिंह के
बाद तिहाड़
जेल में
फांसी दी
गई थी।
इनके बाद
अब यह
फांसी हुई
है। उसे
फांसी पर
चढ़ाए जाने
से पहले
जेल प्रशासन
ने पूरा
डैमो किया
था। उसे
फांसी पर
चढ़ाए जाने
से पहले
जेल अधीक्षक
समेत तीन
अलग-अलग
अधिकारियों ने आखिरी बार बात
कर अफजल
से उसकी
आखिरी इच्छा
पूछी। (38 तस्वीरों में
देखिए, कैसे
मुंबई में
खून की
होली खेली
थी कसाब
ने)
उधर, भाजपा ने
भी इस
कदम का
स्वागत किया
है। भाजपा
के उपाध्यक्ष
मुख्तार अब्बास
नकवी ने
कहा, यह
देर से
लिया गया
जरूरी फैसला
है। यह
देश हित
का फैसला
है। शिवसेना
प्रवक्ता संजय
राउत का
कहना है
कि हम
कांग्रेस सरकार
का अभिनंदन
करेंगे। हम
पहले से
ही अफजल
को फांसी
दिए जाने
की मांग
करते रहे
थे। आखिर
सरकार को
हिम्मत जुटानी
पड़ी और
अफजल को
फांसी पर
लटका दिया
गया।
वहीं, सूचना एवं
प्रसारण मंञी
मनीष तिवारी
ने कहा
कि आगामी
चुनावों के
मद्देनजर यह
फैसला नहीं
लिया गया
हैं। फांसी
का फैसला
न्यायिक था।
देशहित से
कभी भी
समझौता नहीं
किया गया।
इसके साथ
ही उन्होंने
गुजरात सरकार
पर निशाना
साधते हुए
कहा कि
यूपीए सरकार
गुजरात सरकार
जैसी नहीं
है।


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