फेमस डांसर जावेद जाफरी का कहना है
कि बच्चों को बच्चों की तरह ही रहना चाहिए। उन्हें वल्गर डांस नहीं करना चाहिए। जानें
और क्या-क्या कहा जावेद ने हमसे खास बातचीत में...
आजकल तमाम डांस रिऐलिटी शोज़ आ रहे
हैं। 'बूगी वूगी' को कैसे अलग मानते हैं?
आजकल जो डांस रिऐलिटी शोज़ आ रहे हैं,
उनमें से ज्यादातर सिलेब्रिटी डांस शो हैं। इनमें या तो टीवी स्टार नाचते हैं या कोरियॉग्राफर
होते हैं, जबकि 'बूगी वूगी' कॉमन मैन का डांस शो है। इसमें हम आम आदमी को प्लैटफॉर्म
देते हैं। एक और शो 'डांस इंडिया डांस' भी वही कर रहा है, लेकिन इस बात से कोई इनकार
नहीं कर सकता कि 'बूगी वूगी' आम डांसिंग टैलंट को प्लैटफॉर्म देने वाला पहला शो है।
हमने 17 साल पहले यह शो शुरू किया था।
लेकिन क्या इन शोज़ से कॉम्पिटिशन फील
होता है?
हम कॉम्पिटिशन को इस तरह से नहीं देखते।
हमारा मानना है कि ऐसे जितने शो हों, उतना अच्छा है। आखिर हमारे देश में 1.2 बिलियन
लोग हैं। वे कहां जाएंगे? सबको प्लैटफॉर्म चाहिए। इसलिए मैं तो कहूंगा ऐसे और शो होने
चाहिए। फिर आइंस्टाइन ने एक फॉर्म्युला खोजा था- एनर्जी का, उससे कई और चीजें ईजाद
हुईं। इससे आइंस्टाइन की इम्पॉर्टेंस तो कम नहीं हुई। अब दिलीप कुमार साहब को ही लीजिए,
उनकी कॉपी करके बहुत से लोग स्टार बन गए। इससे दिलीप साहब की इम्पॉर्टेंस कम नहीं होगी।
इसी तरह अगर दूसरे लोग हमारे फॉर्मैट पर शो ला रहे हैं, तो इससे हमें फर्क नहीं पड़ता।
ऑरिजनल तो ऑरिजनल ही होता है।
शो को बीच में ब्रेक देने की क्या वजह
रही?
दरअसल, शो की टाइमिंग को लेकर थोड़ी
प्रॉब्लम थी। हमें शो की टाइमिंग शिफ्ट करनी पड़ी थी, इसलिए हमने ब्रेक लेने का फैसला
किया और सोचा कि जब हमें वापस प्राइम टाइम मिलेगा तब हम वापस आएंगे। हालांकि इसमें
तीन साल लग गए।
अब जो वापस आए हैं, तो नया क्या लाए
हैं?
नया... वैसे तो कुछ नहीं है। डांस शो
में डांस के अलावा नया क्या होगा! जैसे ओलिंपिक 60 साल से हो रहा है, ऐथलीट हर साल
भागते हैं, उसमें नया क्या होगा? वैसे हमारे शो में भी बस बच्चे नए हैं, डांस वही है,
हम भी वही हैं।
फिर भी औरों से कुछ अलग करने की कोशिश
रहती होगी?
हम बस डांस पर फोकस करने की कोशिश करते
हैं। ज्यादा ड्रामा करने की कोशिश नहीं करते। आपने नोटिस किया होगा कि हमारी कोशिश
रहती है कि बच्चे वल्गर स्टेप न करें, वैसे कॉस्ट्यूम न पहनें। कभी अगर बच्चे ऐसा करते
हैं, तो हम उन्हें समझाते हैं। जैसे स्विमिंग है, जिमनास्टिक है, वैसे ही डांस भी एक
स्पोर्ट है। उसे वैसे ही करना चाहिए। फिर हम यह भी मानते हैं कि बच्चों को बच्चों की
तरह ही रहना चाहिए।
कुछ कमी, जो आपको महसूस होती हो?
कमी तो नहीं, लेकिन हम चाहते थे कि
शो में इंडियन डांस स्टाइल जानने वाले बच्चे और ज्यादा आते। ऐसा नहीं हो सका। शायद
अभी वेस्टर्न का ही ट्रेंड है। हम जहां भी गए 70 पर्सेंट बच्चे वेस्टर्न डांस फॉर्म
वाले मिले, सिर्फ 25 से 30 पर्सेंट ही इंडियन क्लासिकल वाले मिले। दरअसल, इंटरनेट के
कारण दुनिया इतनी सिमट गई है कि जो वेस्ट में होता है, बच्चे यहां देख लेते हैं और
वैसा ही करना चाहते हैं।


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