फिल्म
डायरेक्टर केसी बोकाडिया एक शादी में शिरकत करने बीते दिनों लखनऊ पहुंचे। वह लखनऊ की
नवाबी शान से रूबरू होना चाहते हैं इसलिए वह मार्च में दोबारा लखनऊ आएंगे। भले ही अब
फिल्मों की सफलता का पैमाना 100 करोड़ क्लब को मान लिया गया हो, लेकिन केसी बोकाडिया
के लिए इस फिगर के कोई मायने नहीं हैं। 'प्यार झुकता नहीं', 'लाल बादशाह', 'आज का अर्जुन',
'तेरी मेहरबानियां', 'नसीब अपना अपना' जैसी हिट फिल्में बना चुके केसी बोकाडिया आज
भी मानते हैं कि दर्शक जितनी बार फिल्म देखें, वही उसकी सच्ची सफलता है। करीब दो साल
के बाद केसी बोकाडिया की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' मार्च में रिलीज हो रही है। बुधवार
को फैशन डिजाइनर मनीष त्रिपाठी के भाई की शादी में शामिल होने के लिए केसी बोकाडिया
शहर में मौजूद थे। 'लखनऊ टाइम्स मसाला मिक्स' ने की उनसे खास बातचीत।
अब गिनती
करना बंद कर दिया है
पचास
से ज्यादा फिल्में बना चुके केसी बोकाडिया कहते हैं, 'अब मैंने फिल्मों की गिनती करना
बंद कर दिया है। पहले गिना करता था। दो बनाईं, तीन बनाईं... अब तो जरुरत ही नहीं समझता
गिनने की। सब कुछ ग्लोबलाइज हो गया है, तो फिल्ममेकिंग का तरीका भी बदल गया है। हमें
भी वक्त के साथ बदलना ही पड़ा। लेकिन जिस तरह से लोग आज 100 करोड़ क्लब के पीछे भाग
रहे हैं, उसे मैं सही नहीं मानता। मेरी नजर में फिल्म अच्छी है या खराब, यह कितना भी
बड़ा फिगर क्यों न हो, तय नहीं कर सकता। अब फिल्म एक हफ्ता चल जाए बड़ी बात है। लेकिन
अगर पैसा कमा लिया, तो ठीक। मैं आज भी मानता हूं कि दर्शक जिस फिल्म को बार-बार देखना
चाहे वही अच्छी और सफल फिल्म है।'
मुझे
नहीं लगता लोगों को बवाल का मौका मिलेगा
बोकाडिया
ने बताया, ''डर्टी पॉलिटिक्स' मार्च में रिलीज हो रही है। जैसा की नाम से ही साफ है
कि यह एक पॉलिटिकल फिल्म है, लेकिन यह किसी राजनेता की कहानी नहीं है। राजनीति का मतलब
है चाणक्य बुद्धि, और यह किसी की भी हो सकती है। यह राजस्थान की एक लड़की की कहानी
है, जो एक सच्ची घटना से प्रेरित है। हाल ही में राजस्थान में चुनाव हुए हैं। मैंने
न किसी पार्टी की बात की है और न राजनेता की। मुझे नहीं लगता कि इस फिल्म के लिए लोगों
को बवाल करने का मौका मिलेगा। यह आवाम की प्रॉब्लम है, जिसे हम आए दिन खबरों में पढ़ा
करते हैं।'
इस बार
मिला हूं लोगों से
लखनऊ
अब परदे पर काफी नजर आ रहा है। क्या आप भी यहां फिल्म बनाएंगे? इस सवाल पर बोकाडिया
ने कहा, 'मैं तो यहां जरूर फिल्म बनाना चाहता हूं और बनाऊंगा। अभी तक मेरा झुकाव जयुपर
के लिए ही था। वहां के लोगों से मिलता रहता हूं। लखनऊ के लोगों से मेरी खास मुलाकात
नहीं थी। लेकिन इस बार मैं कुछ लोगों से मिला हूं। फिल्म के प्रमोशन के लिए आऊंगा,
तो और लोगों से भी मिलूंगा और अगर बात बनीं तो फिल्म यहां जरुर बनाऊंगा।'
अमिताभ
बच्चन को डायरेक्ट करना चाहता था
जिस युवा
को फिल्में देखने का मौका भी नहीं मिला था, वह बॉलिवुड का डायरेक्टर कैसे बना? इस पर
बोकाडिया ने बताया, 'यह सही है कि जयपुर में मुझे फिल्में देखने को भी नहीं मिलती थीं।
मैं 18 साल का था, जब इस नगरी में कदम रखा था। मेरी फैमिली में कोई इस लाइन में नहीं
था। जब लोग यहां मुझसे पूछते कि तुम क्या करना चाहते हो, तो मे
रा जवाब होता कि मैं
अमिताभ बच्चन को डायरेक्ट करना चाहता हूं। और मेरी पहली डायरेक्टोरियल थी अमिताभ बच्चन
के साथ 'आज का अर्जुन'। इस फिल्म के लिए मैंने पहले अमिताभ जी से बात की थी, लेकिन
डेट्स नहीं मिल पाईं। फिर मैंने नसीर को लिया।'
अब तो
प्रमोशन का जमाना है
लखनऊ
आने के सवाल पर केसी बोकाडिया कहते हैं, 'दस साल पहले यहां आया था। इस शहर की जो नवाबी
खासियत है, मैं अभी तक उससे रूबरू हो नहीं पाया हूं। मेरी फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स'
जल्द ही रिलीज हो रही है। अब तो प्रमोशन का जमाना है। जब प्रमोशन के लिए शहरों को चुना
जा रहा था, तो लखनऊ को भी हमने शामिल किया था। तो प्रमोशन के लिए हम फिल्म की पूरी
कास्ट के साथ लखनऊ आएंगे और इस बार मैं यहां के इंटीरियर को जरूर देखूंगा।'


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